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"स्वतंत्रता : राष्ट्र से आत्मा तक"

"स्वतंत्रता : राष्ट्र से आत्मा तक"

पंकज शर्मा
मित्रों राष्ट्र केवल हमारी भौगोलिक सीमा नहीं, हमारी सामूहिक चेतना, स्मृतियों एवं स्वप्नों का जीवंत विस्तार है। स्वतंत्रता दिवस हमें स्मरण कराता है कि स्वाधीनता केवल पराधीनता से मुक्ति ही नहीं, बल्कि अपने विचार, विवेक एवं कर्तव्य के प्रति जागृत होने का नाम है। जिस राष्ट्र का नागरिक अपने अधिकारों के साथ अपने दायित्वों को भी समझता है, वही स्वतंत्रता को सार्थक करता है। हमारी यह स्वतंत्रता उन असंख्य बलिदानों की अमर विरासत है, जिन्हें स्मरण करना ही नहीं, अपने आचरण में जीवित रखना हमारा राष्ट्रीय धर्म है।

धर्म यदि अंतःचेतना का आलोक है, तो वह हमें सत्य, करुणा, संयम एवं कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। राष्ट्रबोध जब इस नैतिक चेतना से जुड़ता है, तब देशप्रेम उन्माद नहीं, साधना वह बन जाता है एवं स्वतंत्रता स्वच्छंदता नहीं, उत्तरदायित्व का उत्सव बनती है। आइए, इस पावन दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने भीतर के अंधकार को ज्ञान से, विभाजन को सद्भाव से एवं उदासीनता को कर्तव्य से पराजित करेंगे। 🇮🇳स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!🇮🇳

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा (कमल सनातनी)
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