शशि एंग्लो विद्यापीठ में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी, सनातन संस्कृति के संरक्षण और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर

ब्रह्मपुर (उड़ीसा)। शशि एंग्लो विद्यापीठ, ब्रह्मपुर में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन उत्साह एवं आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। संगोष्ठी में सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा, बच्चों में संस्कार तथा शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के शिष्य एवं ‘विश्व ब्राह्मण भूषण’ सम्मान से सम्मानित अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने कहा कि भारतीय परंपरा और सनातन संस्कृति के प्रति बच्चों में प्रारंभ से ही जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता और उसकी ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म की परंपरा को समझना और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना आज की पीढ़ी के लिए आवश्यक है।
उन्होंने आदि शंकराचार्य भगवान द्वारा चारों धाम के पुनरुद्धार एवं भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को सुदृढ़ करने के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयी शिक्षा में भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के जीवन-दर्शन को उचित स्थान मिलना चाहिए। रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों के माध्यम से विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध और जीवन-दर्शन की शिक्षा दी जा सकती है। उनके अनुसार संस्कारयुक्त शिक्षा ही चरित्रवान और भव्य समाज के निर्माण का आधार बन सकती है।
अधिवक्ता झा ने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने-अपने क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा के समर्थन में कहा कि भारत को भव्य एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने की दिशा में व्यापक जनजागरण होगा।
कार्यक्रम में दंडी स्वामी लक्ष्मी बाबा ने अपने आशीर्वचन में बच्चों के संस्कार और चरित्र निर्माण पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य बच्चों के हाथों में है और उन्हें शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है।
विद्यालय के संस्थापक प्रशांत दास ने सनातन परंपरा से जुड़े ज्ञान-विज्ञान और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संगोष्ठी के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों में विशेष उत्साह देखा गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्णेन्दु मिश्रा, श्रीमती जानकी पाढि सहित विद्यालय के प्राध्यापक एवं शिक्षिकाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।अंत में ‘हम भारत को भव्य बनाएंगे, हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे’ के जयघोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे परिसर में ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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