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सावन क्यों लगता है मनभावन

सावन क्यों लगता है मनभावन

लेखिका -डॉ.अनिता देवी
सावन क्यों लगता है मनभावन,
क्यों भीग उठता है मन का आँगन?
बादल जब नभ में गीत सुनाते,
सूखी धरती को गले लगाते।


मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू,
याद दिलाए बचपन की हर धुन,
झूले पड़ते पीपल की डाली,
हँसती है हर गली, हर चौबारी।


सावन केवल बारिश नहीं है,
यह जीवन की एक नई कहानी है।
किसान के चेहरे पर मुस्कान लाए,
खेतों में हरियाली के दीप जलाए।


कहीं माँ पकौड़े तलती है,
बच्चों की टोली बाहर निकलती है,
भीगते तन और खिलते मन,
भूल जाते हैं सारे जीवन के ग़म।


सावन सिखाता है समाज को
सूखे मन में प्रेम बरसाना,
जिसके घर खुशियाँ कम हों,
उसके आँगन में दीप जलाना।


जिस तरह बादल भेद नहीं करता,
हर धरती पर पानी बरसाता है,
वैसे ही इंसान भी इंसान बने,
हर दुखी का हाथ थामता जाए।


इसीलिए सावन मनभावन है,
क्योंकि इसमें प्रकृति का प्यार है,
धरती की प्यास बुझाने के संग,
मानवता को भी जीने का संस्कार है।


सावन आए तो इतना याद रहे
पेड़ों को बचाएँ, जल को बचाएँ,
प्रकृति के संग प्रेम बढ़ाएँ,
और हर चेहरे पर मुस्कान सजाएँ।


सावन केवल मौसम नहीं,
यह उम्मीदों का त्योहार है—
धरती, समाज और इंसान के बीच
प्रेम की बरसती फुहार है।🌱

लेखिका -डॉ.अनिता देवी शिक्षिका जिला पूर्वी चंपारण ऊ
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