Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वतंत्रता और अधिवक्ताओं के स्वाभिमान का सवाल

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वतंत्रता और अधिवक्ताओं के स्वाभिमान का सवाल

रमेश कुमार चौबे
महासचिव, नागरिक अधिकार मंच

भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिवक्ता केवल किसी पक्षकार का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि संविधान, न्याय और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाली व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है। ऐसे में बार काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी सर्वोच्च वैधानिक संस्था की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

इसी संदर्भ में नागरिक अधिकार मंच के महासचिव रमेश कुमार चौबे ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उनका आरोप है कि लंबे समय तक पद पर बने रहने और सत्ता पक्ष के साथ कथित निकटता के कारण अधिवक्ता समुदाय के एक वर्ग में असंतोष पैदा हुआ है तथा बार काउंसिल की स्वतंत्रता और अधिवक्ताओं के स्वाभिमान को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

चौबे का कहना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी व्यक्ति विशेष की संस्था नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के न्यायिक अधिकारों और अधिवक्ता समुदाय के हितों से जुड़ी संवैधानिक-वैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति से राजनीतिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और संस्थागत मर्यादा की अपेक्षा स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि यदि अध्यक्ष स्वयं अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो अधिवक्ता संगठनों, बार एसोसिएशनों और बार काउंसिल के सदस्यों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से देशव्यापी आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अन्य वैधानिक विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि विरोध का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि बार काउंसिल की संस्थागत स्वतंत्रता को मजबूत करना होना चाहिए।
संपत्ति की जांच की मांग

रमेश कुमार चौबे ने मनन कुमार मिश्रा की कथित संपत्ति को लेकर भी जांच की मांग की है। उन्होंने उनकी चल-अचल संपत्ति तथा परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े सदस्यों की संपत्तियों की निष्पक्ष एवं सक्षम जांच कराने की बात कही है। हालांकि, इस प्रकार के आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल सक्षम जांच एजेंसियों अथवा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है। किसी व्यक्ति की संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अधिवक्ताओं को एकजुट होने की अपील

चौबे ने देशभर के अधिवक्ताओं से अपील की है कि वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वायत्तता, स्टेट बार काउंसिल की स्वतंत्र संरचना तथा अधिवक्ता समुदाय के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें।

उनका कहना है कि अधिवक्ता समुदाय को किसी भी राजनीतिक दल या सत्ता के प्रभाव से स्वतंत्र रहकर अपने पेशे की गरिमा और संस्थागत स्वायत्तता की रक्षा करनी चाहिए। यदि किसी पदाधिकारी की कार्यशैली को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं तो उनके समाधान का रास्ता पारदर्शी जांच, संस्थागत समीक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरना चाहिए।
सवाल व्यक्ति से बड़ा, संस्था की स्वतंत्रता का है

बार काउंसिल ऑफ इंडिया को लेकर उठ रहे विवाद को केवल किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष के रूप में देखना उचित नहीं होगा। मूल प्रश्न यह है कि देश की सर्वोच्च अधिवक्ता नियामक संस्था कितनी स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह है।

अधिवक्ता समुदाय का सम्मान तभी सुरक्षित रह सकता है जब उसके प्रतिनिधि संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया निष्पक्ष हो और किसी भी प्रकार के राजनीतिक अथवा व्यक्तिगत प्रभाव की आशंका न रहे। इसलिए उठाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना आवश्यक है।

रमेश कुमार चौबे ने अंततः मनन कुमार मिश्रा से अपील की है कि वे व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वतंत्रता और देश के अधिवक्ताओं के व्यापक हित को प्राथमिकता दें। वहीं, यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं तो अधिवक्ता समुदाय को लोकतांत्रिक और वैधानिक माध्यमों से आगे की रणनीति तय करने का आह्वान किया गया है।अब देखना यह है कि इन आरोपों और इस्तीफे की मांग पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया, संबंधित अधिवक्ता संगठन और स्वयं मनन कुमार मिश्रा की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ