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खाने पीने का संयम

खाने पीने का संयम

संजय जैन


खा पीकर तुम देखो
कैसे सांड हो गये।
खुदका खाया सो खाया
औरों का भी खा गये।।


देख हाल फिर खुदका
शरीर से बेहाल हो गये।
चलते भी नही बन रहा
फिर खाने को आतुर है।।


बड़े छोटे आदि सभी का
यही हाल जो रहता है।
माना की पार्टी में आये हो
पर शरीर तो अपना है।।


उतना ही तुम खाओं यारों
जितना तुम पचा सकते हो।
माल पराया है तो क्या हुआ
पर पेट तो हमारा अपना है।।


मानव जैसा भूखा पेटू
और कोई क्या हो सकता।
जब भी मिले मौका तो
टूट खाने पर पड़ता है।।


संतुलित भोजन करके यारों
खुदको भी तुम संतुलित करो।
नित्य नियम के अनुसार ही
अपना खाना पान तुम रखों।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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