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नास्तिक बनने जा रहे हो?

नास्तिक बनने जा रहे हो?

तनिक ठहरो...🖐️

इस संसार में छोटे से छोटे से परमाणु से लेकर बड़े से बड़े ग्रह तक सब में बनावट नजर आती है। कोई भी चीज अपने आप नहीं बनती उसको बनाने वाला निर्माता (constructor) अवश्य होता है

घर में रोटी बनाने का सारा सामान रख दें, चूल्हा, ईघन, आटा, पानी, बेलन आदि सभी कुछ हो लेकिन कोई बनाने वाला ना हो तो करोड़ो व अरबों साल में भी उन पदार्थों से रोटी अपने आप नहीं बन सकते।

अब मानव शरीर के माध्यम से समझाते हैं

जब हम भोजन ग्रहण करते हैं या फिर जल ग्रहण करते हैं तो वह हमारी श्वास नली में प्रवेश क्यों नहीं करता क्योंकि श्वासनली के ऊपर एक छोटा सा लोलक (पल्ला) होता है जिसे कंठच्छद (epiglottis / एपिग्लाटिस) कहते हैं। जब कोई खाना खाता है या कुछ पीता है तो यह कंठच्छद गिर कर श्वासनली को कस के बंद कर देता है। इसी कारण से खाना ग्रासनाल से होते हुए पेट में तो जाता है लेकिन श्वासनाल या फेफड़ों में बिलकुल प्रवेश नहीं करता ।

अब इतनी बारीकियों का मानव शरीर में अपने आप से तो नहीं हो सकता इसको बनाने वाला कोई ना कोई तो होगा।

कभी सोचा है कि गर्भावस्था में शिशु को भोजन पोषण ऑक्सीजन आदि कहां से प्राप्त होता है और शिशु एक निश्चित समय (9 माह) के उपरांत ही गर्भ से बाहर क्यों आता है यह सब अपने आप से तो होने वाला है नहीं

मानव के मस्तिष्क को देखो कैसे व शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करता है अपने हाथों की पैरों की हड्डियों के जोड़ों को देखो जो एक व्यवस्था व परिस्थिति के अनुसार बनाए गए हैं हम केवल भोजन ग्रहण करते हैं उससे रक्त बनने की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है कैसे भोजन से पोषण प्राप्त करने के बाद जो कचरा बचता है उसे निकालने के लिए मलद्वार बनाए गए हैं वह भी अपने आप नहीं हो सकती नर व मादा के लिंग व योनि के संयोग को जानो व कैसे दोनों के वीर्य व रज से उनके ही जैसे दूसरे जीव का निर्माण होता है

मनुष्य के दांतों को देखो आगे वाले दांत नुकीले होते हैं किसी चीज को काटने के लिए व पीछे वाले दांत चौकोर से होते हैं किसी चीज को चबाने के लिए अगर पीछे वाले दांत आगे होते हैं तो भी वो भोजन को नहीं काट पाते और आगे वाले दांत पीछे होते तो वह भोजन को कभी चबा नहीं सकते अब ऐसी व्यवस्था अपने आप तो नहीं हो सकती।

पशुओं आदि की पूछ को देखो जिससे वह मक्खियां मच्छर आदि से अपनी सुरक्षा करती है हर जीव को अपनी सुरक्षा के लिए कोई ना कोई हथियार अवश्य मिला है किसी को सींग किसी को नुकीले दांत किसी को विश सभी को सेल्फ डिफेंस के लिए कुछ ना कुछ मिला है

अब अपने सोलर सिस्टम के माध्यम से समझो कि कैसे सभी ग्रह आदि आपस में टकराए बिना एक व्यवस्था से अनंत काल से चक्कर लगा रहे हैं

हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज में बनावट अवश्य नजर आएगी उसके बनने का कोई ना कोई कारण अवश्य होता है और उसको बनाने वाली उस अदृश्य शक्ति को ही ईश्वर कहा जाता है।

अब कोई कहे की ईश्वर है तो वह दिखाई क्यों नहीं देता अब छोटे-छोटे जीवाणु ,सूक्ष्म जीव प्रकृति पदार्थ एटम प्रोटोन आदि आदि आंखों से दिखाई नहीं देते इसका अर्थ यह नहीं है कि वह है ही नहीं इसीलिए नहीं दिखाई देते कि वह अति सूक्ष्म है इसी प्रकार एटम प्रोटोन आदि को तोड़ते चले जाओ जहां पर उसके टुकड़े नहीं किए जा सकते उसे मूल प्रकृति कहते हैं और उस मूल प्रकृति से भी सूक्ष्म है ईश्वर, ईश्वर ने इस संसार को बनाकर इसे धारण किया हुआ है हर सूक्ष्म से सूक्ष्म कण में ईश्वर है। अब बताओ इतनी सूक्ष्म अवस्था में ईश्वर को आंखों या यंत्र आदि के माध्यम से कैसे देखा जा सकता है

अतः सिद्ध होता है कि इस ब्रह्मांड का निर्माण करने वाली कोई ना कोई अदृश्य शक्ति है अवश्य है जिसे ईश्वर (ओ३म्) कहते हैं

परंतु ईश्वर के नाम पर होने वाले ढोंग पाखंड है का विरोध हम भी करते हैं स्वार्थी व मूर्ख लोगों के ढोंग पाखंड के कारण ईश्वर को न मानना बुद्धिमता नहीं तुम्हारी मूर्खता है

अंत में केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि सोए हुए को जगाया जा सकता है परंतु सोने का नाटक करने वाले को नहीं...✍️

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