वृद्ध मन तू हार न मान
अरुण दिव्यांशहे हमारे वृद्ध मन ,
तू हार नहीं मान ।
वरिष्ठ हो धरा पर ,
तू भार नहीं मान ।।
धरा का सुगंधित ,
न किसी से बंधित ।
जन जन तुम्हें प्यारे ,
तू ही रंजित अनुरंजित ।।
तुम्हीं तो हो अनुभव ,
तुम्हीं तो सच्चा ज्ञान ।
शेष तो बच्चे किशोर ,
शेष युवक होते नादान ।।
तुम्हीं तो हो वीर कुॅंअर ,
अस्सीवाॅं जवानी छाई ।
गोरों की औकात कहाॅं ,
न छल कर पाता भाई ।।
तू बुद्ध विवेक महावीर ,
तू ही तो युवा पथ हो ।
तू ही युवा पथ प्रदर्शक ,
तू ही तो पथ के रथ हो ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews