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साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक को राष्ट्रीय बाल साहित्य के चार सम्मान

साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक को राष्ट्रीय बाल साहित्य के चार सम्मान

  • एक पखवाड़े में चार विधाओं में उत्कृष्ट सृजन के लिए मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, बिहार के साहित्य जगत में हर्ष

जहानाबाद/पटना। बिहार के जहानाबाद जिले के वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार, बाल साहित्यकार एवं शिक्षाविद् सत्येन्द्र कुमार पाठक ने राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का गौरव बढ़ाया है। हरियाणा के सिरसा स्थित प्रतिष्ठित मातेश्वरी विद्या देवी बाल साहित्य शोध एवं विकास संस्थान के व्हाट्सऐप मंच द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बाल साहित्य सम्मेलन में उनके बाल साहित्यिक सृजन को श्रेष्ठ घोषित करते हुए एक ही पखवाड़े के भीतर चार अलग-अलग अवसरों पर सम्मानित किया गया। बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं में लगातार मिली इस राष्ट्रीय पहचान को साहित्य जगत में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

संस्थान की ओर से जारी सम्मान-पत्रों के अनुसार श्री पाठक को बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली लेखन के लिए सम्मान प्रदान किया गया। मंच के समीक्षक एवं बाल साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय साहित्यकार डॉ. राजकुमार 'निजात' ने उनके सृजन की समीक्षा करते हुए उसे श्रेष्ठ और सराहनीय बताया।

चार अवसरों पर मिला सम्मान

प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री सत्येन्द्र कुमार पाठक को पहला सम्मान 31 जुलाई 2026 को 'बाल आलेख' विधा में प्रदान किया गया। इसके बाद 01 अगस्त 2026 को उनके 'बाल नाटक' को श्रेष्ठ मानते हुए दूसरा सम्मान दिया गया।

इसी क्रम में 11 अगस्त 2026 को उन्हें 'बाल कहानी' विधा में उत्कृष्ट लेखन के लिए तीसरा सम्मान प्राप्त हुआ। इसके बाद 15 अगस्त 2026, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, उन्हें पुनः 'बाल नाटक' विधा में विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर उनके चित्र पर तिरंगा लगाकर उन्हें राष्ट्रीय गौरव की भावना के साथ सम्मानित किया गया।

एक ही साहित्यकार को एक ही संस्थान द्वारा इतने कम समय में चार अलग-अलग अवसरों पर सम्मानित किया जाना उनके साहित्यिक सृजन की निरंतरता और गुणवत्ता को रेखांकित करता है। साहित्यिक क्षेत्र में इसे श्री पाठक के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार के बाल साहित्य के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

बाल साहित्य को समर्पित राष्ट्रीय मंच


हरियाणा के सिरसा से संचालित मातेश्वरी विद्या देवी बाल साहित्य शोध एवं विकास संस्थान बाल साहित्य के संरक्षण, संवर्धन, शोध और रचनाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में देशभर में सक्रिय है। संस्थान के मंच पर बाल कविता, हाइकु, लोरी, गजल, कहानी, आलेख, नाटक, पहेली सहित बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं में रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

संस्थान के संस्थापक डॉ. राजकुमार 'निजात', संयोजक राकेश कुमार जैनबन्धु तथा सह-संयोजक बलबीर सिंह वर्मा 'वागीश' के नेतृत्व में देश के विभिन्न राज्यों के बाल साहित्यकारों को एक मंच से जोड़ने और उन्हें प्रोत्साहित करने का कार्य किया जा रहा है।

श्री पाठक को जारी सम्मान-पत्र में संस्थान की ओर से उनके सृजन को श्रेष्ठ बताते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की गई है। इससे स्पष्ट है कि उनके लेखन ने राष्ट्रीय स्तर के बाल साहित्य मंच पर समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया है।

साहित्य, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में लंबा योगदान


सत्येन्द्र कुमार पाठक पिछले कई दशकों से साहित्य, इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और बाल साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके लेख, कहानियां, नाटक, ऐतिहासिक आलेख और विविध विषयों पर रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित और चर्चित होती रही हैं।

वे डीएवी जहानाबाद से भी जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही वे आचार्य कुल के राष्ट्रीय प्रवक्ता, जीवन धारा नमामि गंगे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा मगध ज्योति ब्लॉग्स पोर्टल के संपादक के रूप में भी अपनी सामाजिक एवं साहित्यिक सक्रियता बनाए हुए हैं। शिक्षा और संस्कार से जुड़े विषयों पर भी वे लगातार लेखन एवं जागरूकता का कार्य करते रहे हैं।

बाल साहित्य के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान माना जाता है। उनकी रचनाओं में बच्चों के मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, देशभक्ति, सामाजिक चेतना और संस्कार को प्रमुखता दी जाती है। उनका मानना है कि बाल साहित्य केवल बच्चों के मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र के भविष्य को संस्कारित करने का प्रभावी साधन भी है।

बिहार के साहित्यिक जगत में खुशी


सत्येन्द्र कुमार पाठक को मिले इन राष्ट्रीय सम्मानों से जहानाबाद, पटना सहित पूरे बिहार के साहित्यकारों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और साहित्यप्रेमियों में हर्ष का माहौल है। डीएवी परिवार, अपु आर्ट्स जहानाबाद, आचार्य कुल तथा विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

साहित्यकारों का कहना है कि श्री पाठक को मिला यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और यहां के बाल साहित्य जगत का भी सम्मान है। राष्ट्रीय मंच पर बिहार के रचनाकार की लगातार चार बार हुई सराहना प्रदेश के युवा एवं नवोदित साहित्यकारों के लिए प्रेरणादायक संदेश है।
युवा रचनाकारों के लिए प्रेरणा

साहित्य जगत से जुड़े लोगों के अनुसार आज के डिजिटल युग में बच्चों के बीच पुस्तकों और रचनात्मक साहित्य की भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता है। ऐसे समय में बाल साहित्य को निरंतर समृद्ध करने वाले रचनाकारों का सम्मान नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

श्री पाठक की उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि निरंतर लेखन, विषयों की विविधता और सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। विशेष रूप से बाल कहानी, बाल नाटक और बाल आलेख जैसी विधाओं में उनकी सक्रियता साहित्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसमें मनोरंजन के साथ शिक्षा और संस्कार को भी महत्व दिया जाता है।

सम्मान ने बढ़ाया कार्य के प्रति उत्साह


राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चार सम्मान मिलने पर सत्येन्द्र कुमार पाठक ने मातेश्वरी विद्या देवी बाल साहित्य शोध एवं विकास संस्थान, सिरसा के सभी पदाधिकारियों, संयोजकों और समीक्षक मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है और इससे उन्हें बाल साहित्य के क्षेत्र में और अधिक गंभीरता, जिम्मेदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिली है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बाल साहित्य के माध्यम से बच्चों में भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा।साहित्यकारों और शुभचिंतकों ने आशा व्यक्त की है कि सत्येन्द्र कुमार पाठक की यह उपलब्धि उन्हें आगे भी उत्कृष्ट बाल साहित्य के सृजन के लिए प्रेरित करेगी तथा बिहार की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगी।

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