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औलाद का मोह

औलाद का मोह

औलाद की खातिर माँ-बाप ने
जीवन पूरा लगा दिया।
बच्चों को काबिल बनाने में
सब कुछ अपना गमा दिया।।
औलाद की खातिर माँ-बाप ने
जीवन अपना लगा दिया।


बेटा और बेटी ने देखो
माँ-बाप को भूला दिया।
उनको बेसहारा छोड़ कर
सुख चैन से जी ने चले वो।
जिसने तुम्हें पैदा किया है
उनसे ही मुँह मोड़ लिया है।
ऐसी औलाद से तो अच्छा है
बेऔलाद ही रहना लोगों।।
औलाद की खातिर माँ-बाप ने
जीवन पूरा लगा दिया।


कलयुग का नया ये फेशन
देखते ही जो बनता है।
बिना कोख से जन्म देकर
माँ बनने स्वीकार किया है।
जब लाड़ प्यार और स्नेह
अपनी ममता का न दिया है।
तो तुम कैसे अपनेपन की
पीड़ा को कैसे तुम समझोगे।।
औलाद की खातिर माँ-बाप ने
जीवन अपना लगा दिया।।


अपने रूप की खातिर ही
बच्चों को जन्म नही दिया है।
पर औरों के खून को तुमने
अपना बस नाम दिया है।
जब ये सब तुम करोगें तो
कैसे माँ-बाप से प्रेम करोगें।
अपनापन उनके दिलों में
कैसे तुम जगा पाएंगे।।
औलाद की खातिर माँ-बाप ने
जीवन अपना लगा दिया।
बच्चों को काबिल बनाने में
सब कुछ अपना गमा दिया।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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