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नारी है आधार

नारी है आधार

नारी नारी रटते लोगों ने
उसका सम्मान घटा दिया।
अपनी हवस का समान
देखो कैसे उसे बना लिया।।


जन्म दायनी जिसको कहते
इज्जत उसकी ही लूट रहे।
अपनी इच्छानुसार ही देखो
उसका उपभोग कर रहे।।


मानवता का क्रूर चेहरा लेकर
देखो कैसे अब लोग घूम रहे।
जिसको मिलना चाहिए सम्मान
उसके इज्जत पर हाथ डाल रहे।।


रातें रंगीन करने के लिए
नारी को आधार बना रहे।
बड़े बड़े काम-धामों को
देखो उससे कैसे करवा रहे।।


कलयुग में नारी नाम से
नया महाभारत कैसे रच रहे।
नारी को आगे करके देखो
उसके पीछे कैसे छुप रहे।।


देना चाहते हो सही में
नारी को सम्मान तुम।
तो उसकी इज्जत करना
कलयुग में भी तुम सीखो।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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