भगवान शिव ने रावण को चन्द्रहास खड्ग क्यों प्रदान किया था?

लेखक आनंद हठिला
अधिकांश लोग केवल इतना जानते हैं कि रावण भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन बहुत कम लोग इस दिव्य खड्ग की वास्तविक कथा जानते हैं।
वाल्मीकि रामायण (उत्तरकाण्ड) के अनुसार, एक बार रावण अपने अहंकार में कैलास पर्वत को उठाने लगा। तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलास को दबा दिया। रावण उसी पर्वत के नीचे दब गया और उसका गर्व चूर हो गया।
इसके बाद उसने भगवान शिव की दीर्घकाल तक स्तुति और तपस्या की। उसकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मुक्त किया और 'चन्द्रहास' नामक दिव्य खड्ग वरदान स्वरूप प्रदान किया।
यह कोई साधारण तलवार नहीं थी, बल्कि भगवान शिव के दिव्य अनुग्रह और वीरता का प्रतीक मानी जाती है। भगवान शिव ने रावण को इस दिव्य अस्त्र का सदैव सम्मान करने का उपदेश भी दिया।
इस प्रसंग का सबसे बड़ा संदेश यह है कि-
अहंकार मनुष्य को भगवान से दूर ले जाता है, लेकिन सच्चा पश्चाताप, तप और निष्काम भक्ति उसे पुनः ईश्वर की कृपा का पात्र बना सकते हैं।
यही कारण है कि भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा जाता है—वे भक्त की जाति, कुल, रूप या सामर्थ्य नहीं देखते; वे केवल उसके सच्चे भाव को स्वीकार करते हैं।
हर हर महादेव!
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