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शक करता है

शक करता है

संजय जैन

जिस जिसको अपना माना
उसने ही धोका दिया।
इंसान ने ये फ़ीदरत
सीखी है अंग्रेजों से।।


कहते थे वो कुछ
करते थे अलग ही।
इसलिए उन्हें कभी भी
इज्जत नही देते थे।।


अपना बनाया घर ही
गैहरो के हवाले कर रहे।
अपनी ही आत्मा का
कैसे हनन कर रहे।।


चलता है ऐसे ही जीवन
जिसकी किसी को कद्र नही।
औरों से उम्मीद करें क्या
जब सिक्का अपना खोटा है।।


बदलती तस्वीरें और माहौल
हम से कुछ कहता है।
इंसान की नियत पर देखो
इंसान ही शक करता है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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