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देशभक्ति गीतों से गूंज उठा स्वाभिमान साहित्यिक मंच का 48वां राष्ट्रीय कवि दरबार

देशभक्ति गीतों से गूंज उठा स्वाभिमान साहित्यिक मंच का 48वां राष्ट्रीय कवि दरबार

दुर्गेश मोहन

पटियाला। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर स्वाभिमान साहित्यिक मंच द्वारा "आजादी दिवस विशेष" 48वें राष्ट्रीय कवि दरबार का भव्य आयोजन किया गया। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए रचनाकारों ने अपनी मधुर वाणी और ओजस्वी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।कार्यक्रम के संयोजक नरेश कुमार आष्टा रहे, जबकि इसकी अध्यक्षता संजय दर्दी चोपड़ा, पटियाला ने की। कार्यक्रम का सफल संचालन जागृति गौड़, पटियाला ने किया, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता और देशभक्ति शायरी से पूरे माहौल में जोश भर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जागृति गौड़ द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने आजादी के विभिन्न पहलुओं, रहस्यों और ज्ञानवर्धक जानकारियों से सभी को अवगत कराया। अमरोहा से हरमिंदर कौर ने अपनी रचना "शहीदों की जब बात चली, देश की माटी भी महक उठी। सौ-सौ बार नमन उन वीर सपूतों को, जिनकी खातिर हमको आजादी मिली।।" सुनाकर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। संपत्ति चौरे 'स्वाति' ने अपने प्यारे देश की महिमा का बखान करते हुए कहा, "दिल में एकता की भावना जहां शांति का संदेश है। प्राणों से भी प्यारा हमको हमारा भारत देश है।।" उनकी इस रचना ने खूब वाहवाही बटोरी। आंदोलनकारी भूपेंद्र सिंह देव 'ताऊजी' उत्तराखंड से ने देश के शहीदों को नमन करते हुए अपनी रचना "भारत माता के शहीदों की यह शहादत एक अनमोल धरोहर है। हर रक्त की बूंद ने साकार किया स्वाधीनता का ये सफर है।" सुनाई, जिससे सभी श्रोता आत्मिक रूप से विभोर हो गए।
श्रीनगर, उत्तराखंड से शंभु प्रसाद भट्ट 'स्नेहिल' ने हिंदुस्तान की शान का बखान करते हुए कहा, "हिंदुस्तान की यह शान है, अनेकता में एकता ही पहचान है। भेद नहीं है यहां कोई मन का, भरा भाव है यह सब जन का।।" नई दिल्ली से कालजयी घनश्याम ने अपनी देशभक्ति से भरपूर गजल "वतन के लिए ही जतन जिंदगी है, वतन ही मेरा जानेमन जिंदगी है" सुनाकर सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। संतोष पुरी, नई दिल्ली ने बचपन की यादों के साथ देशभक्ति के गीत गाए और अपनी रचना "चलो सब मिलकर आजादी का जश्न मनाएं, गर्व से सर ऊंचा कर भारतीय कहलाएं।" प्रस्तुत की।पटना से सिद्धेश्वर ने अपनी आजाद गजल "दिल में देशभक्ति, आंखों में चमक है, क्रांति की आग में गजब की दहक है। खूब सुनाई देगी दुश्मनों को हुंकार, हमारी इस आवाज में इतनी दमक है।" सुनाकर माहौल को पूरी तरह बदल दिया। उत्तराखंड से अखिलेश कुमार डोभाल और पटियाला, पंजाब से संजय दर्दी चोपड़ा और मध्यप्रदेश से संतोष मालवीय ने अपनी रचनाओं से सभी को रोमांचित कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में, पटियाला से जागृति गौड़ ने देशभक्ति गीतों के साथ अपनी मार्मिक रचना "सड़कों पर सोता है बचपन, भूख से लाचार है, तब पूछता है दिल मेरा — क्या हम आजाद हैं?" सुनाकर सभी को आज के दौर के देश के हालात पर सोचने पर मजबूर कर दिया। सभी रचनाकारों ने मिलकर "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा" गीत गाकर कार्यक्रम का समापन किया। यह कवि दरबार देशभक्ति की भावना और साहित्यिक अभिव्यक्ति का एक अद्भुत संगम रहा।
प्रस्तुति _दुर्गेश मोहन
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