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हृदयमणि के चरण ही नहीं, आचरण भी पूजनीय था : डॉ. विवेकानंद मिश्र

हृदयमणि के चरण ही नहीं, आचरण भी पूजनीय था : डॉ. विवेकानंद मिश्र

  • ममता, संस्कार और मानवीय संवेदना की प्रतिमूर्ति थीं हृदयमणि देवी
  • ‘अद्यतन भारत’ की संरक्षिका एवं वरिष्ठ पत्रकार रवि भूषण पाठक की माता के निधन पर भावपूर्ण शोकसभा; सामाजिक, साहित्यिक और पत्रकारिता जगत ने दी श्रद्धांजलि

गया, 31 अगस्त।
“कुछ व्यक्तित्व जीवन से विदा होकर भी स्मृतियों से कभी विदा नहीं होते। उनका जीवन स्वयं एक संदेश बन जाता है।” प्रसिद्ध समाजसेवी एवं विदुषी हृदयमणि देवी का जीवन भी कुछ ऐसा ही था। उनके निधन से न केवल परिवार ने अपनी स्नेहमयी मातृशक्ति खोई है, बल्कि समाज ने ममता, सादगी, संस्कार और मानवीय संवेदना से ओतप्रोत एक ऐसी महिला को खो दिया है, जिनकी आत्मीयता से असंख्य लोग जुड़े थे।

हृदयमणि देवी के निधन पर भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय डॉ. विवेकानंद पथ स्थित डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर भावपूर्ण शोकसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विवेकानंद मिश्र ने की। शोकसभा में सामाजिक, साहित्यिक, पत्रकारिता, शिक्षा एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

हृदयमणि देवी ‘अद्यतन भारत’ पत्रिका की संरक्षिका थीं और वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक रवि भूषण पाठक की माता थीं। उनके निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक की भावना व्याप्त है।
“हृदयमणि के चरण ही नहीं, आचरण भी पूजनीय था”

शोकसभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि हृदयमणि देवी का निधन केवल उनके परिवार की अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि समाज ने एक ऐसी आदर्श महिला को खो दिया है, जिनका जीवन सुप्त सामाजिक चेतना को जागृत करने वाला था।

उन्होंने कहा कि हृदयमणि देवी का व्यक्तित्व जितना सरल और सहज था, उतना ही गहरा उनका मानवीय सरोकार था। उनके व्यवहार में आत्मीयता, वाणी में स्नेह और जीवन में संस्कारों की गहरी छाप थी।

डॉ. मिश्र ने कहा-
“हृदयमणि देवी के चरण ही नहीं, उनका आचरण भी पूजनीय था। उनका जीवन हमें बताता है कि सादगी, ममता, संस्कार और सेवा की शक्ति किसी भी व्यक्ति को समाज के हृदय में स्थायी स्थान दिला सकती है।”

उन्होंने कहा कि हृदयमणि देवी द्वारा अपने परिवार को दिए गए संस्कार और जीवन-मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। उनके सरल, विनम्र और स्नेहपूर्ण व्यक्तित्व की स्मृतियां परिवार, समाज और उनके असंख्य शुभचिंतकों के बीच सदैव जीवित रहेंगी।

डॉ. विवेकानंद मिश्र ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा वरिष्ठ पत्रकार रवि भूषण पाठक सहित पूरे शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
मां केवल रिश्ता नहीं, संस्कारों की पूरी दुनिया होती है

शोकसभा में वक्ताओं ने कहा कि परिवार में मां का स्थान किसी अन्य से नहीं भरा जा सकता। मां केवल स्नेह और ममता का प्रतीक नहीं होती, बल्कि वह परिवार की संस्कारशाला और भावनात्मक आधार होती है।

हृदयमणि देवी ने अपने परिवार को स्नेह, अनुशासन, संस्कार और मानवीय मूल्यों से सींचा। यही कारण है कि उनके निधन के बाद उनके परिवार के साथ जुड़े लोग भी स्वयं को इस दुःख में सहभागी महसूस कर रहे हैं।

वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक विरासत उसकी संपत्ति नहीं, बल्कि उसके द्वारा अगली पीढ़ी को दिए गए संस्कार और जीवन-मूल्य होते हैं। इस दृष्टि से हृदयमणि देवी का जीवन अत्यंत समृद्ध रहा।
सादगी, ममत्व और संस्कारों की प्रतिमूर्ति थीं : आचार्य सच्चिदानंद मिश्र

आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हृदयमणि देवी का जीवन सादगी, ममत्व और संस्कारों से परिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि मां द्वारा दिए गए संस्कार व्यक्ति के जीवन में सदैव मार्गदर्शक का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि मां का स्नेह जीवन की ऐसी शक्ति है, जिसकी अनुभूति व्यक्ति को हर कठिन परिस्थिति में होती है। हृदयमणि देवी ने अपने परिवार को जो संस्कार दिए, वे उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान हैं।
उदार मानवता की प्रतिमूर्ति थीं हृदयमणि देवी : ज्योति मांझी

बाराचट्टी विधानसभा की विधायक श्रीमती ज्योति मांझी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि किसी प्रियजन का जाना सदैव अपूरणीय क्षति होती है, लेकिन जब कोई ऐसा व्यक्तित्व विदा होता है जिसने अपना जीवन मानवता और आत्मीयता के लिए समर्पित किया हो, तब उसकी कमी और अधिक महसूस होती है।

उन्होंने कहा कि हृदयमणि देवी उदार मानवता की प्रतिमूर्ति थीं। उनकी स्मृतियां उनके परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों और उनसे जुड़े सामाजिक वर्ग के बीच सदैव बनी रहेंगी।

श्रीमती मांझी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
पत्रकारिता जगत ने भी खोई एक आत्मीय संरक्षिका

हृदयमणि देवी का जुड़ाव केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं था। वे ‘अद्यतन भारत’ पत्रिका की संरक्षिका के रूप में पत्रकारिता जगत से भी जुड़ी रहीं। वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक रवि भूषण पाठक की माता होने के कारण उनका स्नेह और मार्गदर्शन पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक लोगों को भी मिलता रहा।

शोकसभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार और शब्दों का संसार नहीं, बल्कि समाज और संवेदनाओं से जुड़ा माध्यम है। हृदयमणि देवी जैसे आत्मीय व्यक्तित्व का संरक्षण और स्नेह इस संसार के लिए विशेष महत्व रखता था।
दुःख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है पूरा समाज

शोकसभा में उपस्थित लोगों ने वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक रवि भूषण पाठक तथा उनके पूरे परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। लोगों ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में पूरा समाज शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है।

वक्ताओं ने कहा कि किसी प्रिय व्यक्ति की स्मृति को जीवित रखने का सबसे बड़ा माध्यम उसके जीवन-मूल्यों को आत्मसात करना है। हृदयमणि देवी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके जीवन में दिखाई देने वाली ममता, सरलता, संवेदनशीलता और संस्कारों को आगे बढ़ाया जाए।
श्रद्धांजलि के साथ भावुक हुआ माहौल

शोकसभा के दौरान वातावरण भावुक हो गया। उपस्थित लोगों ने दिवंगत हृदयमणि देवी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके आत्मीय व्यक्तित्व को याद किया। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

इस अवसर पर यह भाव भी मुखर हुआ कि मृत्यु जीवन का अंत अवश्य है, लेकिन अच्छे कर्मों और संस्कारों से अर्जित स्मृतियों का अंत नहीं होता। हृदयमणि देवी का जीवन और उनकी स्मृतियां उनके परिवार एवं शुभचिंतकों के बीच लंबे समय तक प्रेरणा देती रहेंगी।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

शोकसभा में समाजसेवी एवं पूर्व आरक्षी उपाधीक्षक इकराम साहब, स्वामी सुमन भारती, पंडित बालमुकुंद मिश्रा, आचार्य अरुण मिश्रा मधुप, आचार्य अभय पाठक, प्रचंड बाबा, मृदुला मिश्रा, सविता कुमारी, सुमन कुमारी, वरिष्ठ अधिवक्ता मु. याहिया, डॉ. जितेंद्र मिश्रा, डिंपल कुमारी, मनीष कुमार, ममता देवी, शारदा मिश्रा, अमृता पाठक, विक्रम मिश्रा, रानी मिश्रा, अनन्या, आयांश, सुगंधा मिश्रा, अनुज्ञा मिश्रा, तनिष्का मिश्रा, प्रियांशु मिश्रा, अनुपम, मेघा मिश्रा, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, प्रो. सुनील कुमार मिश्रा, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, अजय कुमार मिश्रा, सुनील कुमार, पुष्पा देवी, सुमन कुमारी, राखी कुमारी, नुसरत परवीन, रेशमा, रंजना पांडे, दीपक पाठक, संतोष मिश्रा, फूल कुमारी, डॉ. रविंद्र कुमार, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, राजीव नयन पांडेय, अशोक दुबे, जितेंद्र कुमार मिश्रा, विश्वजीत चक्रवर्ती, मनीष कुमार मिश्रा, पार्वती देवी, चंद्रभूषण मिश्रा, रजनी चावला, सुनीता कुमारी एवं कविता रावत सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
एक मां विदा हुई, लेकिन छोड़ गई संस्कारों की अमिट विरासत

हृदयमणि देवी का निधन एक परिवार के लिए मां का जाना है, लेकिन समाज के लिए यह ममता, सादगी और मानवीय संवेदना से जुड़े एक आत्मीय अध्याय का अवसान भी है। उनकी स्मृतियां केवल तस्वीरों में नहीं, बल्कि उन संस्कारों, रिश्तों और जीवन-मूल्यों में जीवित रहेंगी जिन्हें उन्होंने अपने जीवन से सींचा।यही किसी भी जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे सच्ची श्रद्धांजलि है।

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