तुम्हारी सौंदर्य रेखा को, कैसे करूँ अनदेखा
कुमार महेंद्र
अधर जहाँ आकर मौन हुए,
वहीं चाँदनी मुस्काती है।
माथे की बिंदिया कहती है,
तुम-सी कहाँ कोई आती है।
नयनों में ऐसा सम्मोहन,
जैसे कोई मधुर संदेशा।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
तुम भोर की पहली किरण प्रिये,
तुम संध्या का मधुरिम राग हो।
मेरे मन के सूने उपवन का,
तुम ही तो मधुमय अनुराग हो।
महक उठा जीवन-पथ मेरा,
जब से मैंने तुमको देखा।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
पलकों का झुकना-उठना ही,
ऋतुओं का आना-जाना है।
तुम्हारी मंद-मंद मुस्कान ही,
मेरे दिल का आशियाना है।
तुम्हें देखकर हिय में उठती,
मिलन की मृदुल-सी उत्कंठा।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
तुम ईश्वर की अनुपम कलाकृति,
तुम सादगी का श्रृंगार हो।
मेरे नीरस जीवन-पथ पर,
तुम मधुरिम नव-उद्गार हो।
तुमसे सजती मेरी दुनिया,
तुमसे हर पल मन महका।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
तुम्हारे रूप की उजली आभा,
चाँद-सितारों से न्यारी है।
तुम्हारी हँसी की मधुर तरंग,
मन की वीणा पर प्यारी है।
शब्दों में कैसे बाँधूँ तुमको,
तुम तो स्वयं प्रेम की भाषा।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
तुम साथ रहो तो हर मौसम,
मधुमास सरीखा लगता है।
तुम दूर रहो तो यह मन भी,
वनवास सरीखा लगता है।
तुम ही मेरी चाहत का दर्पण,
तुम ही प्रणय का झरोखा।
तुम्हारी सौंदर्य रेखा को,कैसे करूँ मैं अनदेखा।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे फेसबुक पेज से जुड़े
https://www.facebook.com/divyarashmimag
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें
https://www.youtube.com/divyarashminews
हमें ट्विटर पर फॉलो करे :-
https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews