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"सुख का अंतःस्रोत"

"सुख का अंतःस्रोत"

पंकज शर्मा
प्रिय मित्रों हम प्रायः सुख को किसी भविष्य की उपलब्धि से जोड़ देते हैं-अधिक धन, बेहतर अवसर, कोई बड़ी सफलता। इसी प्रतीक्षा में वर्तमान हमारे हाथों से चुपचाप फिसलता रहता है। जबकि जीवन का वास्तविक रस उन्हीं साधारण क्षणों में छिपा है जिन्हें हम महत्वहीन समझकर पार कर जाते हैं-भोजन का स्वाद, अपनों की हँसी, विश्राम की शांति, खिड़की से आती धूप या किसी दृश्य की अनकही सुंदरता।

सुख वस्तुओं की अधिकता नहीं, जीवन के प्रति हमारी दृष्टि की परिपक्वता है। जो मन छोटी प्रसन्नताओं को पहचानना सीख लेता है, उसके लिए आनंद किसी बाहरी परिस्थिति का मोहताज नहीं रहता। तब जीवन को सुखी बनाने के लिए किसी विशेष क्षण की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती; जीने का प्रत्येक क्षण स्वयं में उत्सव बन जाता है।

. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार) 
 पंकज शर्मा
(कमल सनातनी)
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