"सुख का अंतःस्रोत"
पंकज शर्मा
प्रिय मित्रों हम प्रायः सुख को किसी भविष्य की उपलब्धि से जोड़ देते हैं-अधिक धन, बेहतर अवसर, कोई बड़ी सफलता। इसी प्रतीक्षा में वर्तमान हमारे हाथों से चुपचाप फिसलता रहता है। जबकि जीवन का वास्तविक रस उन्हीं साधारण क्षणों में छिपा है जिन्हें हम महत्वहीन समझकर पार कर जाते हैं-भोजन का स्वाद, अपनों की हँसी, विश्राम की शांति, खिड़की से आती धूप या किसी दृश्य की अनकही सुंदरता।
सुख वस्तुओं की अधिकता नहीं, जीवन के प्रति हमारी दृष्टि की परिपक्वता है। जो मन छोटी प्रसन्नताओं को पहचानना सीख लेता है, उसके लिए आनंद किसी बाहरी परिस्थिति का मोहताज नहीं रहता। तब जीवन को सुखी बनाने के लिए किसी विशेष क्षण की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती; जीने का प्रत्येक क्षण स्वयं में उत्सव बन जाता है।
. "सनातन"
(एक सोच , प्रेरणा और संस्कार)
पंकज शर्मा
(कमल सनातनी)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews