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डॉ. जगन्नाथ मिश्र की सातवीं पुण्यतिथि पर गया जी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार आज भी दिखाते हैं भविष्य की दिशा|

डॉ. जगन्नाथ मिश्र की सातवीं पुण्यतिथि पर गया जी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार आज भी दिखाते हैं भविष्य की दिशा|

गया। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता डॉ. जगन्नाथ मिश्र की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर गया जी स्थित डॉक्टर विवेकानंद पथ पर डॉ. विवेकानंद मिश्र के आवास पर एक गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य एवं प्रबुद्ध लोगों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, सामाजिक सरोकार तथा राजनीतिक जीवन को स्मरण किया।

सभा की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. जगन्नाथ मिश्र को केवल अतीत का दस्तावेज नहीं, बल्कि वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला मार्गदर्शी व्यक्तित्व बताया।

डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र बिहार की राजनीति के ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपने उद्देश्यों एवं सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। बिहार के विकास की पीड़ा उनके मन और कर्म में निरंतर प्रवाहित होती रही। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी डॉ. मिश्र ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के माध्यम से अपनी भूमिका का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया।

अपने संबोधन के दौरान डॉ. विवेकानंद मिश्रा भावुक भी हो गए। उन्होंने डॉ. जगन्नाथ मिश्र द्वारा निधन से कुछ महीने पूर्व लिखे गए एक पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें डॉ. मिश्र ने लिखा था—“सच कहूं तो मैं डॉक्टर विवेकानंद बाबू को एक प्राण दो शरीर मानता हूं।” डॉ. विवेकानंद मिश्रा ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व की बात है। उन्होंने उक्त पत्र को उपस्थित लोगों के समक्ष भी दिखाया और कहा कि दोनों के बीच आत्मीय संबंध अत्यंत गहरे रहे।

उन्होंने कहा कि पुण्यतिथि का अवसर केवल किसी दिवंगत महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि अपने वर्तमान का आत्ममंथन करने का भी अवसर है। आज की राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में जिस प्रकार की गिरावट देखने को मिल रही है, वैसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। उन्होंने भावुक होकर कहा—“काश! आज डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र जी होते।”

सभा को संबोधित करते हुए भारतीय जन क्रांति दल के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्रा ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के व्यक्तित्व को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र का जीवन सामाजिक सरोकार, जनसेवा और अपने दायित्वों के प्रति समर्पण का परिचायक रहा। किसी महान व्यक्तित्व की वास्तविक स्मृति केवल पुण्यतिथि मनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके विचारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

प्रसिद्ध समाजसेवी एवं व्यवसायी श्रीचरण बाबू डालमिया ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जीवन में अनुशासन, सरलता और सामाजिक संवेदनशीलता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण में ऐसे व्यक्तित्वों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहती है। डॉ. मिश्र ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति के लिए समाज के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व आवश्यक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मो. याहिया ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में डॉ. मिश्र उन महान व्यक्तित्वों में शामिल थे, जिन्होंने अपने आचरण और विचारों के माध्यम से लोगों को दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

आचार्य सच्चिदानंद मिश्र नैकी ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र को स्मरण करते हुए उनकी सहजता, विद्वता और सामाजिक चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महान व्यक्तित्व अपने कर्मों के माध्यम से समाज पर ऐसी अमिट छाप छोड़ जाते हैं, जिसे समय कभी मिटा नहीं सकता। उनके विचार और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र की स्मृति को जीवंत बनाए रखने का सबसे सार्थक माध्यम उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास है।

राधा मोहन मिश्र माधव ने भी सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जगन्नाथ मिश्र के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र का जीवन समाज और आम लोगों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना से जुड़ा रहा। उन्होंने सामाजिक एकता, सद्भाव और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा लोगों से उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जीवन, राजनीतिक योगदान, विचारों और सामाजिक सरोकारों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मिश्र का व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में उनके विचारों का अध्ययन नई पीढ़ी को सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों को समझने में मदद कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह श्रद्धा, स्मरण और आत्मीयता से भरा रहा। उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उनके जीवन से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका योगदान केवल एक राजनीतिक कालखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक जीवन पर भी उसका व्यापक प्रभाव रहा।

कार्यक्रम के अंत में डिंपल कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र की स्मृति को नमन करने के साथ-साथ उनके विचारों और आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास भी सभी को मिलकर करना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्रद्धांजलि सभा में डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, मनीष कुमार, डॉ. रविंद्र कुमार, चंद्र किशोर सिंह, पन्नू लाल यादव, मोहम्मद हसनैन, अनवरी खातून, शंभू लाल गुर्दा, रीता उपाध्याय, रूबी देवी, अच्युत अनंत मराठे, एस.एन. उपाध्याय, चंद्र मौली प्रसाद, विश्वजीत चक्रवर्ती, निरंजन कुमार, मो. इमरान अली, संतोष कुमार सिंह, विकास कुमार, कुंदन कुमार, पवन मिश्रा, शंभू गिरी बटुक बाबा, शंभूनाथ, दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, मोहम्मद आलम, अमरनाथ पांडेय, श्रवण कुमार, कुमार विभाग कुमार, पार्वती देवी, कुमार प्रदीप सेतिया, कमल कुमार, नुसरत प्रवीन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।सभा के समापन पर उपस्थित लोगों ने डॉ. जगन्नाथ मिश्र के विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा समाज में एकता, सद्भाव, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
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