अवधूत आश्रम से हरिद्वार आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति
सत्येंद्र कुमार पाठक
साहित्यकार व इतिहासकार *सत्येंद्र कुमार पाठक* के नेतृत्व में हरिद्वार सांस्कृतिक विरासत परिभ्रमण का शुभारंभ आज 29 अगस्त 2026 को अवधूत आश्रम, हरिद्वार से किया गया।
इससे पूर्व 27 अगस्त 2026 को बिहार के जहानाबाद से टीम ने प्रस्थान किया। टीम में मुजफ्फरपुर स्वर्णिम कला केंद्र की अध्यक्षा *डॉ. उषा श्रीवास्तव*, आचार्य कुल बिहार की उपाध्यक्ष *डॉ. संगीता सागर*, वैशाली की *डॉ. रेणु शर्मा* सहित कई विद्वान शामिल रहे। सभी सदस्य 28 अगस्त 2026 को अवधूत आश्रम हरिद्वार पहुँचे।
अवधूत आश्रम में आचार्य कुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष *डॉ. धर्मेंद्र*, दिव्य गंगा सेवा मिशन के राष्ट्रीय संयोजक *शिवेश्वर पाण्डेय*, हरियाणा से त्रिलोक चंद, राष्ट्रीय कार्यकारी टीम एवं जीविका भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष *प्रकाश बंधु के साथ साहित्यिक वार्ता हुई। इस अवसर पर डॉ. उषा किरण श्रीवास्तव की पुस्तक "अंजुरी में पंखुरी का लोकार्पण भी किया गया।
29 अगस्त को टीम ने हरि की पैड़ी, प्राचीन मंदिर, घाट एवं पुरातन स्थलों का गहन अध्ययन किया। सत्येंद्र कुमार पाठक ने बताया कि हरिद्वार गली-गली में मंदिर होने के कारण मंदिरों की नगरी कहलाता है। यहाँ 100 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं, पर मुख्य 12 मंदिरों के दर्शन से आध्यात्मिक आनंद और शांति की अनुभूति होती है।
शास्त्रों के अनुसार हरिद्वार के 5 मुख्य तीर्थ हैं - हर की पौड़ी (गंगाद्वार) - भगवान विष्णु को समर्पित, यहाँ विष्णु जी के चरण चिन्ह हैं, समुद्र मंथन में अमृत बूंद यहीं गिरी थी। कुशावर्त घाट -* पितृ पूजा के लिए प्रसिद्ध। कनखल - दक्ष महादेव मंदिर -* भगवान शिव को समर्पित, राजा दक्ष के यज्ञ और सती के आत्मदाह की स्थली। बिल्व तीर्थ - मनसा देवी मंदिर -* माँ मनसा देवी (शिव की मानस पुत्री) को समर्पित, मनोकामना सिद्धपीठ। नील पर्वत - चंडी देवी मंदिर -* माँ चंडी को समर्पित, 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित, चंड-मुंड वध स्थली।
माया देवी मंदिर - हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी, जहाँ सती का हृदय और नाभि गिरी थी, इसी से नाम मायापुरी पड़ा। मनसा देवी और चंडी देवी अन्य दो सिद्धपीठ हैं।
नीलेश्वर महादेव (कालकूट विष धारण स्थली), तिलभांडेश्वर महादेव (स्वयंभू शिवलिंग जो तिल भर घटता-बढ़ता है), बिल्केश्वर महादेव।
भारत माता मंदिर (8 मंजिला, 180 फीट, 1983 में इंदिरा गांधी द्वारा उद्घाटित), पवन धाम मंदिर (कांच के लिए प्रसिद्ध, राधा-कृष्ण को समर्पित), सप्तऋषि आश्रम (जहाँ गंगा 7 धाराओं में बहती है), पारद शिवलिंग, वैष्णो देवी और गौरी शंकर मंदिर।सत्येंद्र कुमार पाठक ने कहा कि हरिद्वार का परिभ्रमण केवल दर्शन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, एकता और पर्यावरण चेतना का जीवंत पाठ है।
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