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बिहार में इको-टूरिज्म का बढ़ा आकर्षण, दो वर्षों में 35.7% बढ़े पर्यटक

बिहार में इको-टूरिज्म का बढ़ा आकर्षण, दो वर्षों में 35.7% बढ़े पर्यटक

पटना, 25 अगस्त। बिहार में पर्यटन का दायरा अब ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से आगे बढ़कर प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव, रोमांच और पर्यावरण आधारित पर्यटन तक तेजी से विस्तारित हो रहा है। राज्य के इको-टूरिज्म केंद्रों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर जहां 55,20,156 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 74,90,847 हो गई। इस तरह महज दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या में करीब 35.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्य में विकसित किए जा रहे इको-टूरिज्म केंद्रों में प्रकृति और रोमांच के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का समावेश किया जा रहा है। इसका असर विशेष रूप से युवाओं, परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के बीच देखने को मिल रहा है।

राजगीर नेचर सफारी में करीब दोगुना हुआ आकर्षण


बिहार के इको-टूरिज्म स्थलों में राजगीर नेचर सफारी सबसे तेजी से लोकप्रिय होने वाले केंद्रों में शामिल है। वर्ष 2022-23 में यहां करीब 1.59 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3 लाख हो गई। यानी दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या करीब 1.89 गुना बढ़ी।

राजगीर की पहाड़ियों और हरियाली के बीच विकसित नेचर सफारी में प्रकृति और रोमांच का अनूठा संगम पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। ग्लास स्काईवॉक, जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और सस्पेंशन ब्रिज जैसे आकर्षण विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। इसके अलावा आर्चरी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियां बच्चों और युवाओं के लिए इसे खास बनाती हैं।

करमचट डैम में तीन गुना से अधिक बढ़ी पर्यटकों की संख्या


कैमूर का करमचट डैम इको-टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार की बढ़ती संभावनाओं का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है। वर्ष 2022-23 में यहां 46,163 पर्यटक पहुंचे थे। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,49,832 हो गई। यानी दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या 3.25 गुना से अधिक बढ़ी।

प्राकृतिक जलाशय, पहाड़ी परिदृश्य, हरियाली और शांत वातावरण करमचट को प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक पर्यटन स्थल बना रहे हैं।

भीमबांध में 2.45 गुना पहुंचा पर्यटकों का आंकड़ा


मुंगेर स्थित भीमबांध इको-टूरिज्म सेंटर में भी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में यहां 35,093 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 85,868 हो गया। इस प्रकार दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या करीब 2.45 गुना हो गई।

भीमबांध का प्राकृतिक वातावरण, वन क्षेत्र और पर्यटन की विकसित होती सुविधाएं इसे राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल कर रही हैं।

मंदार हिल और नागी-नकटी भी पर्यटकों की पसंद


बांका स्थित मंदार हिल इको-टूरिज्म सेंटर में भी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में यहां करीब 80 हजार पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर करीब 98 हजार हो गई।

इसी तरह जमुई स्थित नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी में वर्ष 2022-23 के 30,797 पर्यटकों के मुकाबले 2024-25 में 48,068 पर्यटक पहुंचे। पक्षियों की विविध प्रजातियां और प्राकृतिक वातावरण इस क्षेत्र को पक्षी प्रेमियों तथा प्रकृति पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं।

संरक्षण के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा


बिहार में इको-टूरिज्म के विस्तार का उद्देश्य केवल पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि प्राकृतिक एवं वन्यजीव क्षेत्रों के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसरों का सृजन करना भी है।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, भीमबांध, ककोलत जलप्रपात, कैमूर के वन क्षेत्र, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी, पश्चिमी चंपारण का उदयपुर वन क्षेत्र और मंदार हिल जैसे स्थल राज्य के इको-टूरिज्म सर्किट को मजबूत कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़कर होम-स्टे, स्थानीय उत्पादों की बिक्री, गाइड सेवा, परिवहन, खान-पान और अन्य सेवाओं के माध्यम से आय के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
276 इको-टूरिज्म परियोजनाओं में निजी निवेश की तैयारी

इको-टूरिज्म क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 13 जुलाई को ‘इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट 2026’ का आयोजन किया था। पीपीपी मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर परियोजनाओं के विकास की योजना है।

विभाग ने निजी निवेश के लिए 276 परियोजनाओं की पहचान की है। इनमें 29 जलाशय आधारित परियोजनाएं तथा 247 तालाब, झील, आर्द्रभूमि और अन्य जल निकायों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

चयनित डेवलपर्स को संबंधित स्थल 30 वर्ष की लीज पर दिए जाने की योजना है। सरकार की ओर से समयबद्ध स्वीकृति, वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) तथा बिहार पर्यटन नीति के तहत विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।बिहार में इको-टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता से स्पष्ट है कि राज्य प्राकृतिक पर्यटन की दिशा में एक नई पहचान बना रहा है। यदि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और बुनियादी सुविधाओं पर समान रूप से ध्यान दिया जाए, तो इको-टूरिज्म आने वाले वर्षों में बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन उद्योग का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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