कलम, आज युवाओं की जय बोल
कुमार महेंद्रजो अन्याय के सम्मुख,
सदा अडिग खड़े हैं।
संकल्पों के दीप बन,
नित आगे बढ़े हैं।
आँखों में नव स्वप्न सजे,
हृदय में साहस अनमोल।
कलम, आज युवाओं की जय बोल।।
निर्मम लाठियाँ सहकर भी,
जो नैतिक-पथ पर चलते हैं।
संवादों से परिवर्तन के,
सपने मन में पलते हैं।
जिनके हृदय में सत्य बसा है,
जिनका सच्चाई से मेलजोल।
कलम, आज युवाओं की जय बोल।।
युवा शक्ति जब जाग उठे,
इतिहास स्वयं बदल जाता है।
अन्याय का ऊँचा सिंहासन,
क्षण भर में हिल जाता है।
उनके साहस का यशगान कर,
लिख स्वर्णिम युग के बोल।
कलम, आज युवाओं की जय बोल।।
राष्ट्र-प्रगति के पथ पर बढ़ते,
युवा ही सच्चे आधार।
उनसे ही आलोकित होगा,
भारत का उज्ज्वल संसार।
सत्य, न्याय और स्वाभिमान,
उनके संस्कार अमोल।
कलम, आज युवाओं की जय बोल।।
स्वार्थ नहीं, अधिकारों का,
लेकर पावन संकल्प।
चल पड़े हैं रचने फिर,
भारत का नव विकल्प।
कलम, तू केवल शब्द न लिख,
उनके अंतर्मन के भाव खोल।
कलम, आज युवाओं की जय बोल।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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