तिरंगा भारत की आन, बान और शान ही नहीं, राष्ट्रीय गौरव और संप्रभुता का जीवंत प्रतीक है : डॉ. विवेकानंद मिश्र”

- तिरंगा हमारी राष्ट्रीय गौरव और संप्रभुता का जीवंत प्रतीक : डॉ. विवेकानंद मिश्र
- गया में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर भव्य विचार गोष्ठी, प्रबुद्धजनों ने तिरंगे की आन-बान-शान और राष्ट्रीय एकता पर रखे विचार
गया। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर गया जी के डॉ विवेकानंद पथ स्थित प्रबुद्ध सामाजिक चिंतक एवं कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद के आवास पर एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और देश की एकता-अखंडता की भावना से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, विद्वानों, आचार्यों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने की। गोष्ठी में राष्ट्रीय ध्वज के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता, त्याग, शौर्य, शांति, समृद्धि और राष्ट्रीय एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है।
तिरंगे का सम्मान प्रत्येक भारतीय का राष्ट्रीय कर्तव्य : डॉ. विवेकानंद मिश्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि 22 जुलाई 1947 का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण और महत्वपूर्ण है, जब संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे को अंगीकार किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारे लिए केवल तीन रंगों से बना एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत, त्याग, तपस्या, शांति, साहस और विकास की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जब कोई भारतीय तिरंगे को सम्मानपूर्वक नमन करता है, तो वह वास्तव में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को नमन करता है। तिरंगा हमें अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
डॉ. मिश्र ने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी को तिरंगे की आन-बान-शान और उसके पीछे छिपे संघर्ष एवं बलिदान के इतिहास को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें जाति, धर्म, भाषा तथा क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
तिरंगे के रंग भारतीय दर्शन और जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब : आचार्य सच्चिदानंद मिश्र
गोष्ठी में उपस्थित प्रख्यात विद्वान आचार्य सच्चिदानंद मिश्र (नैकी) ने राष्ट्रीय ध्वज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तिरंगे के प्रत्येक रंग में भारतीय जीवन-दर्शन और राष्ट्र की व्यापक चेतना का संदेश निहित है।
उन्होंने कहा कि केसरिया रंग त्याग, तपस्या, साहस और समर्पण की भावना का प्रतीक है। सफेद रंग सत्य, शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि हरा रंग समृद्धि, खुशहाली और प्रकृति के साथ भारत के गहरे संबंध को अभिव्यक्त करता है। ध्वज के मध्य स्थित अशोक चक्र हमें निरंतर गतिशील रहने, धर्म और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ने तथा राष्ट्र की प्रगति के लिए सतत प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि तिरंगा भारतीय संस्कृति के उस मूल भाव को व्यक्त करता है, जिसमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए सत्य, त्याग, शांति और प्रगति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी गई है।
राष्ट्र निर्माण के लिए नैतिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों को अपनाना जरूरी : आचार्य राधा मोहन मिश्र
आचार्य राधा मोहन मिश्र (माधव) ने राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तिरंगे को नमन करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का संकल्प भी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी और असंख्य लोगों ने यातनाएं सहकर देश की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। आज हमारा दायित्व है कि हम उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।
नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना जरूरी : शारदा साहिबा
कौटिल्य मंच की सचिव शारदा साहिबा ने कहा कि देश की भावी पीढ़ी को भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन और आचरण का हिस्सा बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं और बच्चों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के साथ-साथ उन्हें देश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
तिरंगा हर भारतीय को एक सूत्र में पिरोता है : गजाधर लाल पाठक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गजाधर लाल पाठक ने कहा कि तिरंगा भारत की राष्ट्रीय पहचान का सबसे सशक्त प्रतीक है। यह जाति, धर्म, भाषा और वर्ग के सभी विभाजनों से ऊपर उठकर प्रत्येक भारतीय को एक सूत्र में बांधता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का अर्थ भारत की एकता और अखंडता के सम्मान से है। आज के दिन हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर कभी कोई आंच नहीं आने देंगे और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
बौद्धिक और वैचारिक रूप से मजबूत समाज ही राष्ट्र को विश्व पटल पर गौरव दिला सकता है : डॉ. राकेश दत्त मिश्र
सभा में उपस्थित भारतीय जन क्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रबुद्ध बुद्धिजीवी डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समरसता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक या सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की बौद्धिक चेतना, सामाजिक एकता और वैचारिक मजबूती में निहित होती है।
उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें एकजुट होकर बिना किसी भेदभाव के राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक, कृषि, उद्योग, संस्कृति और सामाजिक विकास के हर क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए।
डॉ. मिश्र ने कहा कि राष्ट्र का गौरव तभी बढ़ेगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे। हमें व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देनी होगी। सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा ही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला है।
राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं ऐसे आयोजन
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रबुद्ध नागरिकों और आम लोगों ने भी राष्ट्र के विकास, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय पर्वों और ऐतिहासिक अवसरों पर आयोजित होने वाली ऐसी विचार गोष्ठियां समाज में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डिंपल कुमारी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में देशभक्ति की भावना को जागृत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
गोष्ठी में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में तिरंगे के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा राष्ट्र की उन्नति और विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि देश के विकास में प्रत्येक नागरिक का छोटा-सा योगदान भी महत्वपूर्ण होता है और यही सामूहिक प्रयास भारत को एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे ले जाएगा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अत्यंत गरिमामय एवं राष्ट्रभक्तिपूर्ण वातावरण में हुआ।
प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
कार्यक्रम में सुमन गिरी, आचार्य अरुण मिश्र 'मधुप', आचार्य शंभूनाथ मिश्र, आचार्य सुनील पाठक, अमरनाथ पांडेय, डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्र, शंभू गिरी, दिलीप कुमार, शिवजी, नीरज वर्मा, अजय मिश्र, सुनील कुमार, अभय सिंह, कुमार, रमाशंकर मिश्र, नीलम पासवान, किरण पाठक, दीपक पाठक, उत्तम पाठक, मृदुला मिश्रा, फूल कुमारी, वीणा कुमारी, पुष्प गुप्ता, पार्वती देवी, पुष्पा राज, कंचन देवी, अमरजीत, सुंदरी देवी, अमन जय शर्मा, रिनकू देवी, पिंकी कुमारी, दीपा, विनय कुमार, हर्षित कुमार, तारा देवी, महंतो, मनीष कुमार, प्रोफेसर अशोक कुमार, राम केवल सिंह, पार्वती देवी, रूबी कुमारी , पुष्पा देवी , मुन्नी कुमारी रेखा देवी, सोनी मिश्रा, चन्द्र भूषण मिश्र , अशोक दूबे, पवन मिश्र एवं रणजीत पाठक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
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