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हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर

(राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस – 2026)

हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर

कुमार महेंद्र
नील गगन में लहराती,
अरुणिम अनुपम ध्वजा महान।
विश्व-पटल पर दिव्य दीप्तिमय,
गौरवमय भारत की पहचान।
केसरिया आभा आलोकित,
वीरता–त्याग–समर्पण सँवार कर।
हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर।।


श्वेत-वर्ण का पावन संदेश,
शांति, सत्य, सद्भाव-प्रकाश।
हरित छटा नवजीवन भरती,
समृद्धि, सुख का शुभ विकास।
नील अशोक-चक्र गतिमय,
सतत प्रगति-पथ साकार कर।
हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर।।


राष्ट्रध्वज है साक्षी पावन,
मातृभूमि के गौरव-गान।
अमर शहीदों के बलिदानों,
त्याग, तपस्या और सम्मान।
प्रेरित करता युग-युग हमको,
भारत-गौरव का विस्तार कर।
हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर।।


वंदन, स्नेह, प्रेम, बंधुत्व,
राष्ट्र-एकता का शुभ सेतु।
रक्षित रहे स्वाभिमान सदा,
विजयी हो भारत का हेतु।
विश्व-शांति का मंत्र सुनाता,
नवयुग का नवनिर्माण कर।
हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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