बुजुर्गों की सलाह
लेखक: आनन्द हठीला
समय की अंधी दौड़ ने बच्चों को आज दादी-नानी से दूर कर दिया है।इनकी बातें,इनकी सुनाई कहानियों से जो शिक्षा और संस्कार मिलते थे आज के बच्चे उनसे वंचित हो रहे हैं। बड़े-बुजुर्गों से हम जिस तेजी से अलग ही रहे हैं उसकी दुगुनी रफ़्तार से संस्कारों ने हमारा साथ छोड़ना प्रारम्भ कर दिया है।परिणाम सामने है - तमाम सुख सुविधाओं बीच भी हमें अशान्ति और बेचैनी का अहसास हो रहा है ! बुजुर्गों की सलाह नित दिन जरूरी हैं उसी संदर्भ मे आज की कहानी..*⬇
एक बार दो गांव के दंबग परिवारों के लड़का और लड़की की शादी तय हुई।
लड़के वाले शादी के लिए बारात लेकर जा रहे थे कि लड़की वालों ने शर्त रख दी कि इस बारात में कोई बुजुर्ग शामिल नहीं होगा।
लड़के वाले मान गए। गांव से बारात चली तो एक बुजुर्ग अड़ गया कि तुम मुझे अपने साथ ले चलो। नौजवानों ने कहा कि बाबा, हम आपको साथ नहीं ले जा सकते।
पर बुजुर्ग नहीं माना। उसने कहा, *“मेरे पास ज़िंदगी का जो अनुभव है वो तुम लोगों के पास नहीं। तुम लोग कहीं फंस न जाओ, इसलिए जरूरी है कि तुम मुझे साथ ले चलो।”*
बुजुर्ग चलने को आतुर था। नौजवान साथ नहीं ले जाने की शर्त से बंधे थे।
आखिर में बुजुर्ग ने कहा कि तुम लोग मुझे बक्से में छिपा कर ले चलो। बात बन गई। उसे एक लोहे के बक्से में छिपा कर वो अपने साथ ले गए।
शादी में किसी बात पर दोनों गांव के नौजवान अपनी-अपनी संपन्नता को लेकर उलझ गए गए। लड़की के गांव वालों ने एक नई शर्त रख दी थी और अड़ गए कि लड़के वाले उनकी चुनौती पूरी नहीं करेंगे, तो ये शादी नहीं होगी। बात गांव की शान तक पहुंच गई। ऐसा लगने लगा कि अब बारात खाली हाथ ही वापस जाएगी।
गांव वालों ने शर्त रख दी थी अगर लड़के वाले खुद को इतना बड़ा बता रहे हैं, इतना संपन्न बता रहे हैं तो वो उनके गांव से जो नदी गुजर रही है, उसे दूध से भर दें।
अजीब बात हो गई। भला नदी को दूध से कैसे भरा जा सकता है?
बात आन बान और शान की हो गई। लड़के वालों को लगा कि अब तो उनकी मूंछ नीची हो गई। लड़की वालों की इस शर्त कोई पूरी नहीं कर सकता था।
आखिर में एक व्यक्ति को याद आया कि एक बुजुर्ग को वो छिपा कर अपने साथ लाए हैं। उसने कहा था कि जब कभी फंस जाओ तो मेरे अनुभव तुम्हारे काम आएंगे। वो व्यक्ति उस बुजुर्ग के पास गया और उसने उससे कहा कि बाबा, सभी फंस गए हैं। लड़की वाले कह रहे हैं कि नदी को दूध से भर दोगे, तभी ब्याह होगा, नहीं तो बारात खाली हाथ ले जाओ।
बुजुर्ग यह सुन कर मुस्कुराने लगा। उसने कहा कि तुम लोग ज़रा भी परेशान न हो।
तुम उनसे कहो कि हम पूरी नदी को दूध से भर देंगे, लेकिन पहले तुम नदी को खाली तो करो। नदी से सारा पानी निकाल दो, हम उसे दूध से भर देंगे।
सचमुच अपने बड़ों के अनुभवों से हमारे पास सीखने को काफी कुछ है। बेशक ये एक कहानी है, लेकिन जब कभी आप किसी मुसीबत में फंस जाएं, तो अपने बड़ों से एक बार राय ज़रूर लीजिए। यकीन मानिए, इस संसार में हर बीमारी का इलाज होता है। बस ज़रूरत है सही डॉक्टर तक पहुंचने की।
वर्तमान समय के भागदौड़ और आधुनिकता से उपजी हताशा और हर मुश्किल का हल बुजुर्ग की छत्रछाया में है। लेकिन क्या सितम है कि हमारे ही समाज के कुछ लोग जब अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल हो जाते हैं तो उन्हें नजरंदाज करना शुरू कर देते हैं जिनकी उंगलियां इनके दुनिया देखने का सहारा बनी थी। अगर हमें इस आधुनिकता में भी सफलता के झंडे गाड़ने हैं तो विरासत और बुजुर्गों का साथ जरुरी है।
'दवा की तरह खाते जाइए गाली बुजुर्गों की,
अच्छे फलो का जायका भले अच्छा नहीं होता।'
उत्तम स्वस्थ्य जीवन हेतु ये नितांत जरूरी है।
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