डॉक्टर्स, सी.ए.-समाज के मूल स्तंभ
कुमार महेंद्रजीवन-पथ की भिन्न दिशाएँ,
दोनों का उद्देश्य उज्ज्वल।
ज्ञान, विवेक, परिश्रम से,
करते जन-जीवन मंगल।
शपथ, समर्पण, श्रम अथाह,
प्रतिभा जिनकी अनुपम सुगंध।
डॉक्टर्स, सी.ए. -समाज के मूल स्तंभ।।
मानव-सेवा परम साधना,
नैतिकता जिनका आभूषण।
रोग-विकारों का निदान,
अर्थ-जगत का सुदृढ़ संचालन।
शोध, सृजन, नव चिंतन लेकर,
गढ़ते प्रगति के नव अनुबंध।
डॉक्टर्स, सी.ए.- समाज के मूल स्तंभ।।
राष्ट्र-विकास के दृढ़ आधार,
स्वस्थ, समृद्ध बने परिवेश।
विधि-विधान का पूर्ण पालन,
कर्तव्य-भाव सदा विशेष।
व्यक्ति, समाज, उद्योग, राष्ट्र,
रचते प्रगति के नव प्रबंध।
डॉक्टर्स, सी.ए.- समाज के मूल स्तंभ।।
करुणा, सेवा, सत्य, समर्पण,
यही सफलता का आलोक।
ईमानदारी, दक्षता, निष्ठा,
इनसे जग में बढ़ता लोक।
हर उपलब्धि का मौन आधार,
इनसे महके जीवन-छंद।
डॉक्टर्स, सी.ए. - समाज के मूल स्तंभ।।
एक जुलाई का शुभ अवसर,
गौरव-गाथा का अभिनंदन।
राष्ट्र नत है कृतज्ञ भाव से,
स्वीकारें शत-शत वंदन।
असीम हृदय से शुभकामनाएँ,
यश महके दिशि-दिग्दिगंत।
डॉक्टर्स, सी.ए. - समाज के मूल स्तंभ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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