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"दिल अभी जवान है"

"दिल अभी जवान है"

रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
मतला
मित्र कहकर बुलाया ना करो,
हम बूढ़े हो रहे, जताया ना करो।

अभी दिल से जवान हैं हम सभी,
बूढ़ा कहकर चिढ़ाया ना करो।

झुर्रियों से उम्र का अंदाज़ यूँ,
हर किसी को लगाया ना करो।

हौसलों का भी यहाँ क्या मोल है,
दिल को हर पल आज़माया ना करो।

धूप ने जो रंग बख्शे हैं हमें,
उनको यूँ ही मिटाया ना करो।

तज़ुर्बों की भी धरोहर कम नहीं,
ज्ञान अपना छिपाया ना करो।

ज़िंदगी हँसकर जिएँ तो क्या बुरा,
हर घड़ी आँसू बहाया ना करो।

दोस्ती की लाज रखना उम्र भर,
बीच रस्ते छोड़ जाया ना करो।
मक़्ता
है 'राकेश' का दिल बच्चा आज भी, उम्र का किस्सा सुनाया ना करो।
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