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गुरु ज्ञान दर्शन

गुरु ज्ञान दर्शन

रचना - डॉ अनमोल कुमार

अंधेरे में जो दीप जलाए,
नाम उसका "गुरु" कहलाए।
शब्दों से भाग्य लिख दे जो,
वो हाथ किसी गुरु का आए।

ना माँगें गुरु धन-दौलत,
बस शिष्य की उन्नति चाहें।
गलती पर डांट भी लगाए,
पर दिल से सदा दुआएं।

गुरु बिन ज्ञान अधूरा है,
गुरु बिन जीवन सूना है।
चरणों में झुक जाऊं मैं, 
 गुरु ही मेरा गहना है।

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