'गोलू गिलहरी के 21 मंत्र' का भव्य लोकार्पण, बच्चों में संस्कार जागृत करेंगी 21 प्रेरक नीतिकथाएँ

पटना, 3 जुलाई। राजधानी पटना के बेली रोड स्थित होटल गोल्डन पाम में शुक्रवार को प्रसिद्ध लेखिका डॉ. इंदिरा झा के बहुप्रतीक्षित बाल कथा संग्रह "गोलू गिलहरी के 21 मंत्र" का भव्य एवं गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और बाल पाठकों की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसी पुस्तकों की अत्यंत आवश्यकता है।
समारोह की अध्यक्षता डॉ. समीर कुमार शर्मा, कुलसचिव, बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने की, जबकि देश के प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि प्रोफेसर अरुण कमल ने पुस्तक का विधिवत लोकार्पण किया। पुस्तक की प्रथम प्रति बाल पाठक चिरंजीव शौर्य को भेंट कर बच्चों के प्रति इस कृति के समर्पण का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार यादव, पूर्व अध्यक्ष, ऑल इंडिया इंग्लिश स्टडीज एसोसिएशन तथा श्री राकेश झा, कमिश्नर, आयकर विभाग, पुणे (महाराष्ट्र) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन स्वयं लेखिका डॉ. इंदिरा झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्री पी.सी. झा ने प्रस्तुत किया।
अपने संबोधन में डॉ. इंदिरा झा ने कहा कि "गोलू गिलहरी के 21 मंत्र" केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कारों का बीजारोपण करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज जब बच्चे मोबाइल और डिजिटल दुनिया में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं, तब माता-पिता यदि प्रतिदिन कुछ मिनट निकालकर इन प्रेरक कथाओं को बच्चों को सुनाएं, तो उनमें ईमानदारी, परिश्रम, दया, अनुशासन और सहयोग जैसे जीवन-मूल्य सहज रूप से विकसित होंगे।
लोकार्पणकर्ता प्रोफेसर अरुण कमल ने कहा कि बाल साहित्य लिखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने डॉ. इंदिरा झा की लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि सरल भाषा, रोचक कथानक और प्रभावशाली संदेशों से सुसज्जित यह पुस्तक बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'गोलू गिलहरी' आने वाले समय में बच्चों का प्रिय पात्र बनेगा और यह पुस्तक प्रत्येक परिवार की पुस्तकालय का हिस्सा होनी चाहिए।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. समीर कुमार शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मूल्यपरक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में यह पुस्तक बच्चों में चरित्र निर्माण और नैतिक चेतना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय स्तर पर भी इस प्रकार के साहित्य को प्रोत्साहित किया जाएगा।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शिवकुमार यादव ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हिंदी में इस प्रकार का गुणवत्तापूर्ण साहित्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की प्रत्येक कथा भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और जीवन-दर्शन का संदेश देती है।
आयकर विभाग के कमिश्नर श्री राकेश झा ने अपने संबोधन में कहा कि व्यस्त जीवनशैली के कारण अभिभावक बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, लेकिन यह पुस्तक प्रतिदिन मात्र दस मिनट में बच्चों को एक नया संस्कार देने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अपने पुत्र को यह पुस्तक पढ़कर सुनाएंगे तथा सुझाव दिया कि प्रत्येक विद्यालय की लाइब्रेरी में इस पुस्तक की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
समारोह में श्री अशोक कुमार सिंह, श्री अमर कुमार, श्री रोहित कुमार राय, श्री बुद्धिनाथ झा, डॉ. प्रदीप झा, डॉ. समरेंद्र झा, श्री सतीश चन्द्र झा, श्री अनिल मिश्र, श्री सुनील मिश्र, डॉ. सुनीता झा, श्वेता झा सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना करते हुए इसे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में उपयोगी और समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश उभरकर सामने आया कि "गोलू गिलहरी के 21 मंत्र" केवल एक बाल कथा संग्रह नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कार, संवेदना और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त अभियान है, जो आने वाले समय में बाल साहित्य की दुनिया में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाएगा।
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