रेखा गुप्ता को बदलनी होगी अपनी कार्यशैली
डॉ राकेश कुमार आर्य
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वास सरमा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तिकड़ी जिस मजबूती के साथ शासन कर रही है वह लोकतंत्र को मजबूत करने वाली कार्यशैली है। लोकतंत्र में शिथिलता और अकर्मण्यता के लिए कोई स्थान नहीं है। लोकतंत्र ही वह पवित्र शासन प्रणाली है जो प्रत्येक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना सिखाती है। इसमें शासन कभी भी बेलगाम नहीं हो सकता। लोकतंत्र ही लोक धर्म निर्धारित करता है और लोकतंत्र ही राजधर्म और राष्ट्रधर्म का निर्धारण करता है। यदि हमें इन शब्दों की गरिमा समझनी है तो हमको पहले भारत के महर्षि मनु को समझना और पढ़ना पड़ेगा। जिन्होंने लोक धर्म, राज धर्म और राष्ट्र धर्म का पवित्र निर्धारण किया है। शासक वर्ग को सज्जन शक्ति के प्रति मोम सा नरम और दुर्जन शक्ति के प्रति लोहे जैसा कठोर होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित उपरोक्त तीनों मुख्यमंत्री महर्षि मनु की इसी विचारधारा का पोषण कर रहे हैं। विपक्ष रह रहकर शोर मचा रहा है कि इन तीनों मुख्यमंत्रियों के द्वारा कहीं न कहीं मानव अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। विपक्ष की ओर से जो नेता इस प्रकार का शोर मचा रहे हैं उनसे पूछा जा सकता है कि जो लोग स्वयं मानव के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं उन्हें मानव किस दृष्टिकोण से माना जा सकता है ? जो स्वयं ही मानव धर्म को छोड़कर दानव बना चुके हैं उन दानवों का सही उपचार करने के लिए ही तो राज्य व्यवस्था स्थापित की जाती है । यदि राज्यव्यवस्था भी मानव और दानव के बीच में अंतर नहीं कर पाएगी तब तो अराजकता का फैलना निश्चित है। जिन पार्टियों ने शासन में आकर भी मानव और दानव के बीच अंतर करने में अपनी विवेक शक्ति का प्रयोग नहीं किया और निहित स्वार्थ में दानवतावाद का पोषण करते रहे, उन्हें चाहे मानव और दानव के बीच अंतर न दिखाई देता हो , परंतु मनुस्मृति के दृष्टिकोण से राज्य व्यवस्था को संभालने वाले लोगों को तो अपने आप ही दिखाई दे जाता है कि मानव कौन है और दानव कौन है ?
हमारा मानना है कि देश के अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हिमंता सरमा और सुवेंदु अधिकारी की कार्य शैली का अनुकरण करना चाहिए । यहां तक कि दिल्ली में काम कर रही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी अपनी ही पार्टी के इन मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री के रूप में श्रीमती रेखा गुप्ता की कार्यशैली इतनी अधिक मंझी हुई नहीं है, जितनी इन तीनों मुख्यमंत्रियों की है। श्रीमती रेखा गुप्ता सहित देश के प्रत्येक मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि जनता उसी को वोट करती है जो जनता को सुरक्षा प्रदान करता है। जीवन की अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से पहले व्यक्ति को सुरक्षा चाहिए। यदि समाज में रहकर लोगों की बहन बेटी का सम्मान सुरक्षित नहीं है और सरकार प्रायोजित और सरकार समर्थित आतंकवाद के चलते उनके लिए जीवन कठिन होता जा रहा है तो कोई भी मुख्यमंत्री 5 वर्ष रहकर शासन कर सकता है, परंतु अगले वर्ष अगले चुनाव में उसकी वापसी होगी भी या नहीं - इस पर प्रश्नचिह्न अपने आप लग जाता है। सत्ता में वापसी उसी की होती है जो मजबूती से शासन करता है और लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। भ्रष्टाचार और मुठमर्दी से शासन करने वाले लालू प्रसाद यादव जैसे मुख्यमंत्री का क्या हाल होता है ? हमने यह भी देखा है और राक्षस प्रवृत्ति के लोगों के विरुद्ध डंडा उठकर काम करने वाले योगी आदित्यनाथ को किस प्रकार जनता पुरस्कार देती है ? - हमने यह भी देखा है।
दिल्ली में जिस प्रकार हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं - उनकी ओर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ध्यान देना चाहिए। यह इसलिए भी आवश्यक है कि दिल्ली हमारे देश की राजधानी है । जिसमें न केवल देश के कोने कोने के लोग रहते हैं अपितु विश्व के अनेक देशों के लोग भी यहां पर रहते हैं। दिल्ली को यदि हांडी का एक चावल कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । जैसे हांडी के एक चावल से लोग अनुमान लगा लेते हैं कि चावल पका है या नहीं पका है, वैसे ही दिल्ली को देखकर लोग पूरे देश के बारे में अनुमान लगा लेते हैं कि भारत में कानून व्यवस्था की स्थिति कैसी हो सकती है ? इसलिए मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को कैग रिपोर्ट, शराब घोटाला, मनी लांड्रिंग जैसे जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्य करना चाहिए। यदि वह स्वयं इन बिंदुओं की ओर से आंखें मूंद कर बैठेंगी तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि जनता सब कुछ देखती भी है , सब कुछ जानती भी है और समय आने पर सही निर्णय भी दे देती है। लोकतंत्र में जनता ही तय करती है कि किस नेता के लिए कब कयामत आएगी और किस नेता को जन्नत मिलेगी या किसको दोजख मिलने वाली है। जिन लोगों ने शीशमहल खड़े किए उनको भी लोगों ने दोजख की आग में धकेल दिया है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता का बुलडोजर शान्त क्यों है ? वह उस क्षेत्र में जाकर काम क्यों नहीं कर रहा जहां वास्तव में अपराधी छुपा बैठा है। हिंदुओं की ओर ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बुलडोजर पहुंच रहे हैं ? यदि उनके विरोधी ऐसा आरोप लगा रहे हैं और इसमें थोड़ी सी भी सच्चाई है तो मुख्यमंत्री को समझ लेना चाहिए कि वह स्वयं अपने पैरों पर अपने आप कुल्हाड़ी मार रही हैं। श्रीमती रेखा गुप्ता को समझना चाहिए कि देश की राजधानी दिल्ली हिंदुस्तान का दिल है। जहां सुरक्षा व्यवस्था बहुत मजबूत रहती है। निश्चित रूप से यहां छुपा हुआ विदेशी आतंकवादी या अराजक तत्व पश्चिम बंगाल के उन विदेशी घुसपैठियों और अराजक तत्वों से अधिक भयंकर नहीं हो सकता, जिनके विरुद्ध मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी मजबूत इच्छा शक्ति का प्रदर्शन करते हुए उन पर कड़ा प्रहार किया है। बहुत संक्षिप्त से समय में उन्होंने राष्ट्र विरोधी तत्वों की कमर तोड़ कर रख दी है । पूरा देश उनकी इस बहादुरी का लोहा मान चुका है और उन्हें एक अच्छा मुख्यमंत्री होने का प्रमाण पत्र भी दे चुका है। देश का जनमानस मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से भी इसी प्रकार के आचरण की अपेक्षा करता है। उन्हें अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करना होगा। जन अपेक्षाओं को समझकर जो व्यक्ति शासन चलाता है वही सफलता को प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के पास बहुत समय है। उन्हें दूर तक चलने के लिए कठोर बनना पड़ेगा। नदी के किनारे चलते-चलते कभी नदी को पार नहीं किया जा सकता। नदी को पार करने का एक ही रास्ता है कि नदी में कूद जाओ। कूदने पर ही दिलेर लोग दूसरे कोने को छू पाते हैं।
( लेखक डॉ राकेश कुमार आर्य सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं )
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