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"भाव तरंगिणी"

"भाव तरंगिणी"

"कन्यादान गीत"
रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
मुखड़ा 
दिया है हाथों में हाथ नाथ, ये दोनों भोले-भाले हैं, 
बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं। 
दिया है हाथों में हाथ नाथ...

बंद – १
जिस आँगन में किलकारी थी, वह आँगन सूना होगा,
जिस चौखट पर हँसती थी वो, मन रो-रो कर सोएगा।
बचपन की सारी यादें ले, पिया-घर आज सिधारे हैं,
बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं॥

बंद – २
नाज़ों से जिसको पाला था, पलकों पर जिसे बिठाया, 
हर दुःख से उसको दूर रखा, हर सुख का फूल खिलाया। 
अब जीवन की नैया उसकी, तेरे ही हाथ सहारे हैं, 
बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं॥

बंद – ३
बेटी तो घर की लक्ष्मी है, बेटी से जग उजियारा, 
उसके बिन सूना लगता है, घर का हर कोना सारा।
इसके सपनों की खुशबू से, जीवन के बाग सँवारे हैं,
 बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं॥

बंद – ४
वर-वधू के इस पावन बंधन में, प्रेम सदा मुस्काए,
सुख-दुःख की हर कठिन डगर पर, दोनों साथ निभाएँ। इनके जीवन में भर देना, जितने सुख के भंडारे हैं, 
बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं॥

बंद – ५
आशीष यही है माता-पिता का, सदा सुहाग सलामत हो,
 प्रेम, भरोसे और मर्यादा से, जीवन पुष्पित-पावन हो। 
तेरी कृपा से दोनों के, पूरे हों सपने जो न्यारे हैं, 
बस इतना ध्यान रहे भगवन, मेरी आँखों के तारे हैं॥

समापन
कन्यादान की इस बेला में, नम हैं नयन हमारे, 
सौंप रहे हैं तुझको प्रभु, ये जीवन के उजियारे। 
राकेश की विनती सुन लेना, ये सबसे प्यारे-प्यारे हैं, 
बस इतना ध्यान रहे भगवन, ये मेरी आँखों के तारे हैं॥
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