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"रक्तदान : महादान"

"रक्तदान : महादान"

( एक एक बूंद जिंदगी के नाम)
रचना- डॉ अनमोल कुमार

ये कैसा दान है जो
जेब से नहीं, रगों से निकलता है?
ये कैसी पूजा है जो
मंदिर में नहीं, अस्पताल में होती है?
ये रक्तदान है – महादान है।

न जाति पूछता है, न धर्म देखता है,
न अमीर का, न गरीब का होता है।
ए, ए+ बी, बी+ ओ, ओ बी।
बस यही पहचान है इंसान की।
जब मौत सामने खड़ी हो,
तो एक यूनिट खून ही भगवान हो जाता है।

सोचो उस माँ को
जिसका लाल ऑपरेशन टेबल पर है,
सोचो उस बाप को
जिसकी बिटिया थैलेसीमिया से लड़ रही है,
सोचो उस जवान को
जो सरहद पर गोली खाकर आया है –
तुम्हारा 15 मिनट, उसकी पूरी जिंदगी है।


क्यों महादान?
अन्नदान से पेट भरता है एक दिन,
वस्त्रदान से तन ढकता है एक बार।
पर रक्तदान?
वो सीधा जीवन देता है।
मर कर देहदान, जी कर रक्तदान –
दोनों से बड़ा कोई दान नहीं।


शास्त्र कहते हैं – _"देहि मे ददामि ते"_
तू मुझे दे, मैं तुझे दूँगा।
तुमने खून दिया,
प्रकृति ने 24 घंटे में नया बना दिया।
घाटा कहाँ हुआ? नफा ही नफा है –
पुण्य भी, सेहत भी।


भ्रम तोड़ो
"कमजोरी आ जाएगी" झूठ है।
शरीर में 5 लीटर खून, देते सिर्फ 350 ml,
"मोटे लोग ही दे सकते हैं" गलत।
45 किलो वजन, हीमोग्लोबिन 12.5 – बस।
"दर्द होता है"– एक चींटी के काटे जितना।
पर सामने वाला जिंदगी भर दुआ देगा।


हर 2 सेकंड में देश में
किसी को खून की जरूरत पड़ती है।
सड़क हादसा, डिलीवरी, कैंसर, एनीमिया –
लिस्ट लंबी है, डोनर कम हैं।
हम त्योहार पर भीड़ लगा देते हैं,
ब्लड बैंक में सन्नाटा क्यों?




आओ वादा करें –
जन्मदिन पर केक नहीं, रक्तदान करेंगे।
शादी की सालगिरह पर पार्टी नहीं, कैंप लगाएंगे।
पितरों की याद में भोज नहीं,
10 यूनिट खून दान करेंगे वही सच्चा श्राद्ध।


18 से 65 साल, स्वस्थ शरीर
साल में 4 बार दे सकते हो।
सोचो – तुम 1 साल में 4 जिंदगी बचाओगे,
50 साल में 200 जिंदगी।
एक आदमी, 200 परिवारों की मुस्कान।


"ना मंदिर में, ना मस्जिद में,
भगवान मिलता है स्लाइन में।
एक बूंद तुम्हारी, सांस उसकी,
रक्तदान है सबसे बड़ी बंदगी।"


करके देखो – नशा है ये।
जब कोई अनजान कहे – "आपके खून से मेरा बेटा बच गया"
उस दुआ की कीमत दुनिया में नहीं।




रक्तदान महादान
करें, कराएं, जीवन बचाएं( रचनाकार - *डॉ अनमोल कुमार* ने 18 बार रक्तदान किया है और अब मधुमेह के कारण रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं )
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