मातृत्व, संस्कार और प्रतिभा का महाकुंभ बना ‘माँ तेरे लिए’ महोत्सव

- गोपालगंज गौरव एवं बिहार गौरव सम्मान से विभूतियों का हुआ अभिनंदन
गोपालगंज, 11 जून 2026। मातृत्व, भारतीय संस्कार, संस्कृति और सामाजिक चेतना को समर्पित भव्य आयोजन ‘माँ तेरे लिए... संस्कार महोत्सव’, ‘गोपालगंज गौरव सम्मान’ एवं ‘बिहार गौरव सम्मान’ समारोह का आयोजन कृष्णलता फाउंडेशन एवं ओशनिक माइंड स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में देव पार्टी जोन होटल एंड मैरेज हॉल, गोपालगंज में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, प्रशासन, प्रौद्योगिकी, लोकसंस्कृति एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
समारोह का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर बलिराम सिंह, अरविन्द सिंह, नीलेश त्रिपाठी, डॉ. मिथिलेश सिंह, प्रो. शारदिंदु तिवारी, प्रभाकर कुमार मिश्रा, संगीता तिवारी, अनिल सिंह तथा डॉ. पी.के. मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का विधिवत उद्घाटन किया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण में कहा कि सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति योगदान का अभिनंदन होता है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा का संचार करते हैं।
समाज के नायकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले व्यक्तित्वों को गोपालगंज गौरव सम्मान एवं बिहार गौरव सम्मान से अलंकृत किया जाना रहा।
राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीता तिवारी, जनहित पत्रकारिता एवं सामाजिक सरोकारों पर निर्भीक लेखन के लिए प्रभाकर कुमार मिश्रा तथा संस्कृत साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण-संवर्धन हेतु प्रो. शारदिंदु तिवारी को गोपालगंज गौरव सम्मान प्रदान किया गया।
वहीं वैश्विक तकनीकी नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मदनजीत कुमार सिंह और तरुणेश कुमार को बिहार गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। बिहार की लोकसंस्कृति, मैथिली-भोजपुरी लोकधारा एवं छठ गीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पंडित हृदयनारायण झा को बिहार गौरव सम्मान (विशेष श्रेणी) से विभूषित किया गया।
युवाओं को मिला प्रेरणा का संदेश
मुख्य अतिथि अरविन्द सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, जिसके स्नेह, त्याग और मार्गदर्शन से जीवन की दिशा निर्धारित होती है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि एवं संस्कृत विद्वान प्रो. शारदिंदु तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘मातृदेवो भवः’ केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब वह विनम्रता, सेवा, सम्मान और मानवीय संवेदनाओं का विकास करे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र भावनाओं, संस्कारों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से सराबोर रहा। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत गीत ‘ले जाओ दौलत मैं माँ रख लेता हूँ’ ने मातृ प्रेम की अनुपम महिमा को जीवंत कर दिया। वहीं नन्हे बच्चों की प्रस्तुति ‘माँ के अनेक रूप’ ने मातृत्व के त्याग, वात्सल्य और ममता को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया।
‘कौन सा मंत्र जपूँ मैं’, ‘चंदा रे’ तथा ‘बुरे काम का बुरा नतीजा’ जैसी प्रस्तुतियों ने मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक मंचन ‘समुद्र मंथन : विषपान’ नाट्य प्रस्तुति रही, जिसमें भगवान शिव के लोककल्याण हेतु विषपान के प्रसंग को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘शिव तांडव’ की ऊर्जावान प्रस्तुति ने पूरे सभागार को शिवमय कर दिया और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इसके अतिरिक्त ‘माँ : द लाइट ऑफ लाइफ’, ‘मदर्स लव : द मैजिक ब्लैंकेट’ एवं ‘आईना समाज का’ जैसी प्रस्तुतियों ने मातृत्व, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश दिया।
आद्या नारायण सिंह की प्रस्तुति ‘ऐसी होती है माँ’ तथा शाम्भवी सिंह की भावपूर्ण प्रस्तुति ‘डगर है मुश्किल’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं रव्यांश चौबे एवं प्रतीक श्रीवास्तव की कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भक्ति और संवेदना से ओत-प्रोत गीत ‘माँ-बाप से बढ़कर जग में’, ‘साँसों की माला पे’, ‘राम के गुणगान कीजिए’, ‘जग में माई बिना केहू’, ‘मन से बड़ा बहुरूपिया न कोई’ एवं ‘जब आँख खुली तब’ ने पूरे वातावरण को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के रंगों से सराबोर कर दिया।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
समारोह के समापन अवसर पर विद्यालय के निदेशक दिग्विजय नारायण सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, सम्मानित विभूतियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मातृशक्ति और भारतीय संस्कारों को समर्पित ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज तभी प्रगति करता है जब वह अपने प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों का सम्मान करना सीखता है और गोपालगंज गौरव सम्मान तथा बिहार गौरव सम्मान उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों एवं गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान सभागार में गौरव, आत्मीयता, संस्कार और प्रेरणा का अद्भुत वातावरण बना रहा, जिसने इसे गोपालगंज के सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन का एक यादगार आयोजन बना दिया।
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