(प्रकृति केवल हमारी आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है।आइए, वृक्षारोपण, जल-संरक्षण और स्वच्छता को केवल अभियान नहीं, अपना सुसंस्कार बनाएँ।विश्व पर्यावरण दिवस पर कुछ पंक्तियां सादर निवेदित हैं 🙏)
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार
कुमार महेंद्रपेड़-पौधे, जीव-जगत सब,
धरती माँ के प्राणाधार।
नदियाँ, निर्झर, गिरि, सागर,
रचते सुरम्य प्रकृति-संसार।
सहेजें इस अनुपम धरोहर को,
बहती रहे सुख की रसधार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
नैसर्गिक सानिध्य सदा ही,
जीवन को करता आह्लादित।
मृदुल पवन, हरित छाया,
मन-अंतर को करे पुलकित।
कण-कण में अपनापन झलके,
महके खुशियाँ अपरम्पार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
हरित धरा का आँचल लहराए,
उमंगित हो जन-जन का मन।
वृक्षारोपण महायज्ञ बने अब,
यही सृष्टि-रक्षा का साधन।
दुःख-दाह मिटे, सुख-संपदा फले,
हो जीवन मंगलमय साकार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
प्रकृति-कोष में निहित सदा ही,
जीवन-शक्ति अपार, अमोल।
संयमित उपभोग अपनाकर,
बचाएँ धरा की आभा अनमोल।
नव ऊर्जा के शुभ आलोक से,
जगमग हो उज्ज्वल संसार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
रोकें धरा-दोहन की प्रवृत्ति,
त्यागें प्लास्टिक का अंध प्रयोग।
प्रकृति-संग जीने की संस्कृति,
मानवता का पावन योग।
आओ मिलकर प्रण ये कर लें,
हरित बने अपना व्यवहार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
स्वच्छ वायु, निर्मल जलधारा,
हर प्राणी का है अधिकार।
वसुधा का श्रृंगार बचाना,
मानव का प्रथम सदाचार।
समृद्ध, सुखी, सुरक्षित भविष्य हेतु,
करें प्रकृति से निश्छल प्यार।
पर्यावरण संरक्षण बने अब सुसंस्कार।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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