प्रेम इतना कोमल नहीं होता
डॉ. अनीता देवीप्रेम इतना कोमल नहीं होता,
जितना फूलों का बिछौना होता।
यह तो तपती धूप में छाया बन,
हर दुख में साथ खड़ा होता।
प्रेम केवल मीठे शब्द नहीं,
आँखों का सच्चा जल होता है।
जब दुनिया मुँह मोड़ ले हमसे,
तब वही अपना संबल होता है।
प्रेम त्याग की गहरी गाथा,
मौन हृदय का संगीत है।
यह आँसू पीकर भी मुस्काए,
ऐसा अनमोल पुनीत है।
प्रेम नदी सा बहता रहता,
चट्टानों से भी लड़ जाता।
अपने प्रिय की एक खुशी पर,
सारा जीवन अर्पण कर जाता।
प्रेम इतना कोमल नहीं होता,
कि झोंकों से टूट बिखर जाए।
यह तो वटवृक्ष की जड़ों जैसा,
हर तूफ़ाँ में और निखर जाए।
जिसे मिला सच्चा प्रेम जग में,
वह सबसे धनवान कहलाया।
प्रेम ईश्वर का सुंदर उपहार,
जिसने जीवन का अर्थ बताया।डॉ. अनीता देवी की भावनाओं को समर्पित ✍️🧚💐❤️
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