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डॉ. जगन्नाथ मिश्र किसी जाति विशेष के नहीं, मानवता की धरोहर थे : डॉ. विवेकानंद मिश्र

डॉ. जगन्नाथ मिश्र किसी जाति विशेष के नहीं, मानवता की धरोहर थे : डॉ. विवेकानंद मिश्र

गया में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की जयंती पर आयोजित हुई स्मृति सभा, वक्ताओं ने याद किए उनके ऐतिहासिक योगदान

गया, संवाददाता। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं जननेता स्वर्गीय डॉ. जगन्नाथ मिश्र की जयंती के अवसर पर गया स्थित विवेकानंद पथ पर मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान, भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा एवं कौटिल्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य स्मृति सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लेकर डॉ. मिश्र के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया।

सभा के मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी आचार्य सच्चिदानंद मिश्र ‘नैकी’ ने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र केवल एक सफल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री, महान शिक्षाविद् और समाज के अंतिम व्यक्ति के हितैषी थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी बिहार के विकास की आधारशिला हैं।

वक्ताओं ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री रहते हुए प्राथमिक शिक्षकों के राजकीयकरण, उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने तथा नए विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों की स्थापना जैसे ऐतिहासिक निर्णयों को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र का जीवन सादगी, विद्वता और जनसेवा का अनुपम उदाहरण था।

सभा की अध्यक्षता करते हुए महासभा एवं कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि “डॉ. जगन्नाथ मिश्र किसी जाति या वर्ग विशेष के नेता नहीं थे, बल्कि वे संपूर्ण मानवता की धरोहर थे। मानवीय संवेदना, उदारता, सहिष्णुता और दूरदर्शिता उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताएं थीं।”

उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और सरलता का परिचय देते थे तथा समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी को लोकतंत्र की मजबूती का आधार मानते थे। डॉ. मिश्र अक्सर कहा करते थे कि समाज का सजग एवं नैतिक बौद्धिक वर्ग ही किसी व्यक्ति या समूह की तानाशाही प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगा सकता है।

विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र के विचार, उनकी कार्यशैली और जनकल्याण की अवधारणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके जीवनकाल में थी। उनके आदर्शों पर चलकर ही एक शिक्षित, समृद्ध और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

कार्यक्रम में आचार्य अरुण मिश्रा, आचार्य सुनील पाठक, अमरनाथ नाथ मिश्र, आचार्य कुमुद कुमार मिश्र, पंडित अजय मिश्र, हरिनारायण त्रिपाठी, विनोद तिवारी, मो. याहिया, जगन गिरी, मो. आरिफ, डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, प्रो. सुनील कुमार मिश्र, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, डॉ. रविंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सभा का समापन राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक समरसता एवं जनकल्याण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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