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प्रकृति की रक्षा के बिना मानव जीवन का अस्तित्व खतरे में, – सत्येन्द्र कुमार पाठक

प्रकृति की रक्षा के बिना मानव जीवन का अस्तित्व खतरे में, – सत्येन्द्र कुमार पाठक

जहानाबाद (बिहार)। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर 'जीवनधारा नमामि गंगे' के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आम जनमानस से प्रकृति की रक्षा का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बढ़ती तकनीकी और औद्योगिकीकरण के बीच यदि हमने अपनी धरती और पर्यावरण को नहीं संभाला, तो आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने इसके गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक ठोस कदम उठाया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 5 जून से 16 जून 1972 तक आयोजित 'विश्व पर्यावरण सम्मेलन' में इस पर गहन चर्चा की गई। इसके ठीक एक साल बाद, 5 जून 1973 को दुनिया का पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया । वर्ष 1974 में 'मानव पर्यावरण' विषय (Theme) के साथ इसे आधिकारिक तौर पर हर साल मनाना शुरू किया गया।: वर्ष 1987 में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि पर्यावरण के प्रति वैश्विक एकजुटता दिखाने के लिए हर साल इसके आयोजन का केंद्र (मेजबान देश) बदला जाएगा श्री पाठक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज यह दिवस महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि धरती को बचाने की वैश्विक पुकार बन चुका है। वर्तमान में यह अभियान 143 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा जन-पहल (Public Outreach) मंच है। इसके माध्यम से दुनिया भर की सरकारें, सामाजिक संस्थाएं, कॉर्पोरेट घराने और मशहूर हस्तियां एक साथ आकर निम्नलिखित गंभीर मुद्दों पर रणनीति तैयार करते हैं:: लगातार बढ़ता तापमान ग्लेशियरों को पिघला रहा है और मौसम चक्र को बिगाड़ रहा है। : महासागरों में बढ़ता प्रदूषण समुद्री जीवन को नष्ट कर रहा है।: तेजी से बढ़ती आबादी के कारण प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है और अवैध शिकार से जैव विविधता खतरे में है। विकास ऐसा हो जिससे हमारी वर्तमान जरूरतें भी पूरी हों और भविष्य की पीढ़ी के लिए संसाधन भी सुरक्षित रहें। "पर्यावरण को सुधारने के लिए यह दिवस एक मील का पत्थर है, जहां पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का साझा रास्ता निकालता है। प्रकृति की रक्षा के लिए केवल नीतियां बनाना काफी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील होना होगा।" — सत्येन्द्र कुमार पाठक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (जीवनधारा नमामि गंगे) उन्होंने अंत में अपील की कि जहानाबाद सहित पूरे बिहार और देश के कोने-कोने में लोगों को जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति सजग होना होगा, क्योंकि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा कल सुरक्षित रहेगा।
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