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विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस

अरुण दिव्यांश
जिस प्रकार प्रकृति ने सृष्टि के द्वारा हमें जीवन दिया है , उसी प्रकार प्रकृति ने जीवन को संतुलित , संतुष्ट और स्वस्थ रखने के लिए शुद्ध पर्यावरण हेतु वृक्षों का भी निर्माण किया है ।
इस धरा पर जितने भी कीड़े मकोड़े , जीव जंतु , वनस्पतियाॅं आदि प्रकृति के द्वारा बनाई गई हैं , वे सभी इस मनुज वंशज के हितार्थ और रक्षार्थ ही हैं , किंतु यह मानव अपने चंद स्वार्थ सिद्धि हेतु सबको अनावश्यक रूप से छेड़छाड़ करना आरंभ करके स्वयं ही जीवन रूपी पैरों पर कुल्हाड़ी चलाना भी आरंभ कर दिया है । अर्थात् जो कुछ भी मानव के रक्षार्थ बने हैं , मानव आज उसी का भक्षार्थ बना पड़ा है ।
जिन वनस्पतियों से हमें जन्म से लेकर मृत्यु तक हमें जलावन , औषधियाॅं और उपस्कर प्राप्त होते हैं , उन वृक्षों को बहुत तीव्र गति से काट काट कर उसे नष्ट किया जा रहा है , जबकि आज जलावन की समस्या अत्यल्प हो गई है , किंतु आधुनिक युग में उपस्कर की उपयोगिता बढ़ जाने से वूक्षों की कटाई इतना विस्तार रूप ले लिया है , कि उसके अनुरूप वृक्षारोपण हो नहीं पा रहा है , जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और हम अस्वस्थ और अल्पायु होते जा रहे हैं , जिसके जिम्मेदार केवल एक सरकार ही नहीं है , बल्कि उसके जिम्मेदार काफी हद तक हम भी हैं । केवल सरकार को ही दोष देना यथोचित नहीं है , क्योंकि पर्यावरण को बचाने का दायित्व जितना सरकार की है , उतना ही दायित्व उसके प्रति हमारा भी है ।
लेकिन वृक्ष खरीदने वाले भी हम ही हैं , वृक्ष खरीदने वाले भी हम ही हैं , प्रोत्साहित करनेवाले भी हम ही हैं । विरोध करने का परिणाम मारपीट हत्या , केस से जुझना पड़ता है और दिन रात काम करते हुए भी महंगाई के कारण भरपेट भोजन भी मुश्किल से ही हो पाता है , फिर केस से निपटने के लिए पैसे कहाॅं से ?
इसके लिए भी हमसब एक हों , वृक्ष बचाऍं , पौधे लगाऍं , उन्हें संरक्षित करें , अपनी भूमिका निभाऍं । यही हमारा राष्ट्र प्रेम है , यही हमारा राष्ट्र धर्म है , जीवन सुरक्षा हेतु ,
वृक्ष बचाना कर्म है ।
वृक्ष नहीं तो शाम है ,
वृक्ष है तो विहान है ,
वृक्ष से जहाॅं सुरक्षित ,
वृक्ष जीवन मान है ।


पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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