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सत्य सदा चलता अग्निपथ पर

सत्य कभी आसान मार्ग नहीं चुनता…वह अग्निपथ पर चलता है, तपता है, संघर्ष करता है और अंततः प्रकाश बनकर जग को आलोकित करता है। मेरी नवीन कविता“सत्य सदा चलता अग्निपथ पर”आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद की प्रतीक्षा में।

सत्य सदा चलता अग्निपथ पर

कुमार महेंद्र
तपती धूप में जलता है,
फिर भी आगे बढ़ता है।
सत्य अनमोल मोती बन,
हर परीक्षा में निखरता है।
झूठ के घनघोर अँधेरों में,
डटा धर्म की दृढ़ शपथ पर।
सत्य सदा चलता अग्निपथ पर।।


डगमग होती राह कभी,
पर दीप सत्य का जलता है।
धैर्य-धरा की कठोर कसौटी पर,
हर क्षण यह तपकर ढलता है।
भटक सके पथिक कुछ पल को,
पर लौटे विजय के रथ पर।
सत्य सदा चलता अग्निपथ पर।।


अन्यायों की ऊँची दीवारों से,
टकराकर भी नहीं बिखरता।
संघर्षों की ज्वाला में तपकर,
और अधिक उज्ज्वल निखरता।
सत्य-सूर्य फिर उदित हो जाता,
नव चेतना भरता सुपथ पर
सत्य सदा चलता अग्निपथ पर।।


मिटा सके इसको जग में,
इतना सामर्थ्य कहाँ किसी में।
दुःख के घोर अँधेरों में भी,
हँसता रहता अपने ही दम में।
निर्झर-सी निर्मल खुशियाँ बहतीं,
जब मन खिलता सच की सुगंध पर।
सत्य सदा चलता अग्निपथ पर।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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