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"काहिल प्रशासन, खबरदार!"

"काहिल प्रशासन, खबरदार!"

रचना ~ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
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*बंद - १*
भरत तिवारी के शहादत का जो बना है सूत्रधार,
प्रशासन सुन लो ध्यान लगाए;
जनता का अपमान करोगे, जनमत देगी मार,
काहिल प्रशासन, खबरदार! खबरदार!!
*बंद - २*
जिसने जन-सेवा का किया था समग्र विस्तार,
उसकी जड़ को काट दिया तुम करके झूठा प्रचार;
झूठे आरोप लगाकर किया है अत्याचार,
जन-मन सब पहचान रहा है;
काहिल प्रशासन, खबरदार! खबरदार!!
*बंद - ३*
अंग्रेजों वाली चाल तुम्हारी अब न चलेगी हर बार,
जनता जागी, देश जागा है;
सच्चाई की ज्वाला से मत करना कभी तकरार,
आँधियों में भी दीप जलेंगे;
काहिल प्रशासन, खबरदार! खबरदार!!
*बंद - ४*
कुर्सी के मद में अंधे होकर, भूल गए अधिकार,
रक्षक ही भक्षक बन बैठे,
करते पीठ पे वार;
चमक रही जो महलों में, वह स्वेद-बिंदु की है कतार,
अब हिसाब हर एक कतरे का, करने को जनता तैयार;
काहिल प्रशासन, खबरदार! खबरदार!!
*बंद - ५*
सत्य डिगेगा नहीं कतई, चाहे कर लो लाख प्रहार,
इंकलाब की गूँज उठेगी, टूटेगा अहंकार;
न्याय और अधिकार माँगती, आज खड़ी है जनता द्वार,
सिंहासन खाली करना होगा,
आया है जन-क्रांति का ज्वार;काहिल प्रशासन, खबरदार! खबरदार!!
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