सांसों में बस जाए जब किसी का नाम,तो हर धड़कन प्रेम का उत्सव बन जाती है…।मेरी नई कविता“सांस-सांस में नाम है तेरा”आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद की प्रतीक्षा में।
सांस-सांस में नाम है तेरा
कुमार महेंद्रअंग-प्रत्यंग नव यौवन झलके,
उर में उमंग-लहरियाँ।
संवादों की मधुरिम आभा,
मनहर हृदय-अठखेलियाँ।
बारिश-बूंदों-सी चंचलता,
नेह-सिक्त उर-भाव मेरा।
सांस-सांस में नाम है तेरा।।
स्वर-माधुर्य रिमझिम-सा बरसे,
जीवन उत्सव-सा अनुपम।
हाव-भाव अति मृदुल मनोहर,
प्रणय-सुगंधित हर मौसम।
रग-रग स्पंदित मिलन-पिपासा,
तृप्ति-तरंगित मधुर सवेरा।
सांस-सांस में नाम है तेरा।।
हिय-पटल का प्रीत-सरोवर,
भावों का अंतरंग स्पर्श।
शब्द-सुरभि चाहत में भीगी,
मुस्कानों का चंद्रित हर्ष।
निशि-दिन रम्य प्रतीक्षा में,
धड़कन-धड़कन प्रिय उकेरा।
सांस-सांस में नाम है तेरा।।
रम्य-सौम्य मन-उपवन महके,
स्वप्निल प्रीति-वाटिकाएँ।
चाल-ढाल की मृदु प्रभा में,
मनहर हँसी की लतिकाएँ।
तन-मन मंदिर-सा पावन,
रोम-रोम में तेरे प्रणय का बसेरा।
सांस-सांस में नाम है तेरा।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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