Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

देवस्थान इनाम कानून स्थगित करने पर राजस्व मंत्री का आभार, मंदिर संगठनों ने जताई खुशी

देवस्थान इनाम कानून स्थगित करने पर राजस्व मंत्री का आभार, मंदिर संगठनों ने जताई खुशी

नागपुर। महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप 2026’ को स्थगित किए जाने की घोषणा के बाद राज्यभर के मंदिर ट्रस्टियों और हिंदू संगठनों में खुशी की लहर है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने नागपुर में इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार सभी पक्षों की राय सुनने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के संगठनकर्ता सुनील घनवट ने कहा कि यह राज्यभर के मंदिर ट्रस्टियों, हिंदू संगठनों और धर्मप्रेमी नागरिकों के संगठित संघर्ष की बड़ी सफलता है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर राज्य के विभिन्न जिलों में मंदिर ट्रस्टियों की बैठकों, पत्रकार वार्ताओं तथा देवस्थान भूमि संरक्षण परिषदों के माध्यम से व्यापक जनजागरण किया गया था। इस अभियान में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, अष्टविनायक मंदिर समिति, विश्व हिंदू परिषद तथा राज्यभर के मंदिर ट्रस्टियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

श्री घनवट ने कहा कि राजस्व मंत्री द्वारा प्रस्तुत कई सूत्र मंदिरों के हित में हैं। इनमें देवस्थान की इनामी भूमि को पुनः मंदिरों को लौटाने, वक्फ बोर्ड की तर्ज पर अतिक्रमण हटाने, कानूनी मामलों में प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं की सलाह लेने तथा 100 से 200 वर्ष पुराने कब्जों के मामलों में मंदिरों को नुकसान न होने देने के लिए समान मूल्य की वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने इन निर्णयों को स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि इससे मंदिर संपत्तियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

मंदिर महासंघ ने यह भी स्वागत किया कि 15 अगस्त तक विभिन्न पक्षों की सुनवाई के लिए गठित की जाने वाली अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की 15 सदस्यीय समिति में देवस्थान प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही गई है। इससे मंदिरों की समस्याओं और सुझावों को सीधे सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

हालांकि मंदिर संगठनों का मानना है कि अभी भी कई महत्वपूर्ण विषयों को प्रस्तावित कानून में शामिल किया जाना आवश्यक है। महासंघ ने मांग की है कि मंदिरों में भक्तों द्वारा अर्पित निधि का उपयोग केवल हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार, मंदिरों के जीर्णोद्धार तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए ही किया जाए। इस धनराशि को किसी भी सरकारी या गैर-धार्मिक योजना पर खर्च न किया जाए और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण मंदिर निधियों के दुरुपयोग पर पूर्ण रोक लगाई जाए।

संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य के समृद्ध मंदिरों की निधि का एक हिस्सा छोटे और उपेक्षित मंदिरों के पुनर्निर्माण एवं विकास में लगाया जाए। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले गुरव, पुजारी, पुरोहित तथा अन्य मंदिर सेवकों के लिए प्रति माह 10,000 से 15,000 रुपये तक की सम्मानजनक निर्वाह निधि (मानदेय) शुरू की जाए, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके।मंदिर संगठनों ने उम्मीद जताई है कि सरकार आगामी चर्चा और सुनवाई प्रक्रिया में इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा ऐसा कानून बनाएगी जो मंदिरों की संपत्तियों, परंपराओं और धार्मिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। यह निर्णय फिलहाल मंदिर ट्रस्टियों और हिंदू संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ