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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर भारतीय जन महासभा ने किया नमन, जमशेदपुर सहित देश-विदेश में आयोजित हुए कार्यक्रम

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर भारतीय जन महासभा ने किया नमन, जमशेदपुर सहित देश-विदेश में आयोजित हुए कार्यक्रम

जमशेदपुर, 18 जून 2026। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की महानायिका और वीरता, साहस तथा राष्ट्रभक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस गुरुवार को भारतीय जन महासभा के तत्वावधान में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जमशेदपुर के डिमना चौक और आदित्यपुर सहित देश-विदेश के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय इतिहास की ऐसी अमर विभूति हैं, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका जीवन आज भी देश के युवाओं, महिलाओं और राष्ट्रभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की अमर गाथा है।

डिमना चौक में पुष्पांजलि अर्पित कर किया स्मरण


डिमना चौक में आयोजित कार्यक्रम की संयोजक मधु सिन्हा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चन्द्र पोद्दार द्वारा रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने एक-एक कर वीरांगना के चित्र पर पुष्प अर्पित किए तथा उनके जीवन एवं संघर्षों को याद किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने उस समय विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका, जब महिलाओं की सामाजिक भूमिका सीमित मानी जाती थी। उन्होंने अपने अद्वितीय साहस और युद्ध कौशल से यह सिद्ध कर दिया कि देशभक्ति और वीरता किसी एक वर्ग या लिंग की बपौती नहीं है।

कार्यक्रम में मधु सिन्हा, निशा वाणी, आरती श्रीवास्तव, अनिल छापोलिया, सुमित राज कात्यायन, सुकुमार मंडल, सोनू घोष, गीता धवल, हरजीत कौर, मंजू सिन्हा, एस.के. सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आदित्यपुर में भी श्रद्धा के साथ मनाया गया बलिदान दिवस

आदित्यपुर में आयोजित कार्यक्रम के संयोजक प्रकाश मेहता ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस को नमन किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारतवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई। उनका संघर्ष केवल झांसी की रक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश में स्वतंत्रता चेतना को जागृत करने वाला था। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी उनके आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रकाश मेहता, अंजू सिंह, अंजली सिंह, रेषु देवी, निर्मला देवी, शोभा पांडेय, सुशीला देवी, धरोधर देवी, इदू देवी, कौशल्या देवी, संजीव सिंह, राजा घोष, अरुण राय, हेमंत, सुमित, अनिल चौधरी, आजाद जी, अनिल कुमार झा, ज्योतिषी जी, चंद्रशेखर सिंह, रंजन सिंह, लक्ष्मी जी, रविशंकर जी, गीता देवी, शिवदा जी, कुंदन जी, आकाशदीप, गिरीश जी एवं संतोष चौबे सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

देश-विदेश में भी हुए स्मृति कार्यक्रम


भारतीय जन महासभा के अनुसार झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर देश और विदेश के अनेक स्थानों पर भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लेकर वीरांगना को नमन किया तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।

इन आयोजनों में मुख्य रूप से सुखेन मुखोपाध्याय, बिदेह नंदिनी चौधरी, मोतीलाल शर्मा, ओमप्रकाश अग्रवाल, पूनम ढलवानी, मधु परिहार, दीप शेखर सिंहल, कृष्णा कुमार साहा, मेघाश्री मुखोपाध्याय, दुर्गा मुखोपाध्याय, मनोहर लाल वालेचा, नरेंद्र पुरोहित, अनीता यादव, किरण राठौड़, कुमरावत सर, सूरज, माधव, चेतना, पंकज, मीना, ललिता, लक्ष्मी गुंसाईं, सलोक तथा पीयूष तुलस्यान सहित अनेक लोगों ने सहभागिता निभाई।

राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति की प्रतीक हैं लक्ष्मीबाई


कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई भारतीय नारी शक्ति, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की सर्वोच्च प्रतीक हैं। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की नींव को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अध्याय है। भारतीय जन महासभा ने संकल्प व्यक्त किया कि वह आने वाली पीढ़ियों तक ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को पहुंचाने का कार्य निरंतर करती रहेगी।

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