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जीबीएम कॉलेज में बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के विरोध में शिक्षकों ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन

जीबीएम कॉलेज में बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के विरोध में शिक्षकों ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन

गया जी। गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय, गया के शिक्षक संघ ने प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के विरोध में महाविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कॉलेज के शिक्षकों ने भाग लिया तथा प्रस्तावित अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की। सभी शिक्षकों ने एक स्वर में प्रस्तावित नये कानून को विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों की स्वायत्तता, शैक्षणिक वातावरण तथा प्रशासनिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बतलाया। कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है। कॉलेज की पीआरओ डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि प्रदर्शन के दरम्यान शिक्षक संघ की अध्यक्ष डॉ अनामिका कुमारी एवं सचिव डॉ नगमा शादाब के नेतृत्व में प्रो. अफ्शां सुरैया, डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ बनीता कुमारी, डॉ रुखसाना परवीन, डॉ प्यारे माँझी, प्रीति शेखर, डॉ शुचि सिन्हा, डॉ पूजा, डॉ पूजा राय, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ कृति सिंह आनंद, डॉ अमृता कुमारी घोष, डॉ सुरबाला कृष्णा, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ फरहीन वजीरी, डॉ प्रियंका पांडेय, डॉ सीता, डॉ आशुतोष कुमार पांडेय, डॉ अफ्शां नाहिद, डॉ सीमा कुमारी एवं शिक्षकेतर कर्मियों में सुनील कुमार, विक्रम कुमार, मीरा देवी आदि ने बिहार सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि प्रस्तावित अधिनियम के प्रावधानों पर शिक्षक संगठनों, विश्वविद्यालय समुदाय तथा अन्य सभी हितधारकों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। संघ ने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण माध्यमों से उच्च शिक्षा, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदर्शन का समापन एक सामूहिक प्रस्ताव (संकल्प) के साथ हुआ, जिसमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, स्वायत्तता एवं संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए रचनात्मक संवाद तथा आवश्यक संशोधनों की मांग की गई। उल्लेखनीय है कि बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन से संबंधित हाल के प्रस्तावों के विरोध में राज्यभर के शिक्षक संगठन, छात्र एवं विश्वविद्यालय कर्मचारी अपनी चिंताएँ व्यक्त कर रहे हैं।
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