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जानती है झोपडी कि बरसात आयेगी,

जानती है झोपडी कि बरसात आयेगी,

गर्मी से राहत, खेत को जल लायेगी।


चिन्तित हैं महल, बारिश के खौफ से,
बरसी गर दिन में, किचकिच हो जायेगी।


सूखेंगे कैसे कपडे, अगर भीग गये तो,
सुविधा में महल की, कुछ खलल आयेगी।


आती मुसीबत झोपडी पर, यह तो सच है,
बारिश की पहली बूँद, मिट्टी महक जायेगी।

डॉ अ कीर्ति वर्धन
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