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जी ले खुश होकर, ज़िंदगी थोड़ी है

जी ले खुश होकर, ज़िंदगी थोड़ी है

डॉ अनीता देवी
जी ले खुश होकर, ज़िंदगी थोड़ी है,
हर सुबह नई है, हर शाम थोड़ी है।
जो पल मिला है, उसे मुस्कुराकर जी ले,
किस्मत की किताब में हर पन्ना थोड़ी है।


कल की फ़िक्र में आज न खो देना,
आँखों के सपनों को यूँ न रो देना।
जो अपने हैं, उन्हें दिल से लगा ले,
हर रिश्ते की उम्र भी लंबी थोड़ी है।


कभी धूप मिलेगी, कभी छाँव आएगी,
जीवन की नैया यूँ ही बहती जाएगी।
ग़मों को सीने से लगाकर क्या मिलेगा,
हर दर्द की कहानी भी पूरी थोड़ी है।


माता-पिता का साया है तो सम्मान कर,
अपने संस्कारों पर सदा अभिमान कर।
जो प्रेम बाँटे, वही अमर हो जाता है,
साँसों की यह डोर सदा रहती थोड़ी है।


इसलिए हँस ले, गा ले, कुछ नेक काम कर,
गिरते हुए को थाम ले, उसका नाम कर।
क्या लेकर आए थे, क्या लेकर जाएँगे,
दो दिन का मेला है, ज़िंदगी थोड़ी है।॥ 🌹🙏॥


लेखिका -डॉक्टर अनीता शिक्षिका जिला पूर्वी चंपारण ,बिहार
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