मिथिला पेंटिंग अब विश्व धरोहर के रूप में स्थापित, महिलाओं के लिए बन रही आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: माया श्रीवास्तव
.jpeg)
बेंगलुरु (कर्नाटक)। समर्थ नारी–समर्थ भारत संगठन की ओर से बेंगलुरु के शहजापुर स्थित वंडर वर्ल्ड सोसाइटी में आयोजित पांच दिवसीय मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग प्रशिक्षण शिविर एवं कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर मिथिला पेंटिंग की बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीमा सक्सेना ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आरती जायसवाल ने किया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए संगठन की राष्ट्रीय सह-संयोजिका तथा बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की प्रभारी माया श्रीवास्तव ने कहा कि मिथिला पेंटिंग आज केवल एक कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व स्तर पर स्थापित धरोहर बन चुकी है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में मधुबनी पेंटिंग की मांग लगातार बढ़ रही है और यह हजारों महिलाओं एवं युवाओं के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बन रही है।

माया श्रीवास्तव ने कहा कि यदि मधुबनी पेंटिंग को टेक्सटाइल डिजाइन और आधुनिक फैशन उद्योग से जोड़ा जाए तो इसके परिणाम अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रशिक्षित महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे साड़ी, कुर्ती, दुपट्टा, पूजा की थाली, कुशन कवर, बैग, बांस एवं हस्तशिल्प उत्पादों पर मधुबनी पेंटिंग कर उन्हें बाजार में अच्छे मूल्य पर बेच सकती हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक भारतीय कला को भी नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। सिलाई-कढ़ाई, बुटीक, पेंटिंग सेंटर और अन्य लघु उद्यमों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। मधुबनी पेंटिंग और सिलाई-कटाई का प्रशिक्षण शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।
माया श्रीवास्तव ने बताया कि समर्थ नारी–समर्थ भारत संगठन कई जिलों में प्रशिक्षण केंद्र संचालित कर रहा है और शीघ्र ही अन्य जिलों में भी नए केंद्र खोले जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल विकास एवं रोजगार से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम की अध्यक्ष सीमा सक्सेना ने कहा कि मधुबनी अथवा मिथिला पेंटिंग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इसकी कलात्मकता, रंग संयोजन और सांस्कृतिक महत्व इसे विश्व की उत्कृष्ट लोक कलाओं में स्थान दिलाते हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से इस कला को अपनाने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मधुबनी पेंटिंग की विभिन्न शैलियों, रंगों के उपयोग, डिज़ाइन निर्माण तथा बाजार आधारित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर शशि बत्रा, सुधा रानी, उषा चौरसिया, नीशू राय, मीना श्रीवास्तव, नीलम रानी, उमा बिहारी, गिन्नी ठाकुर, झूमा देवी, मीना देवी, रोमिता, आरती जायसवाल, संगीता, विमला लाल, संध्या शर्मा, सोनी गुमला, अनु प्रिया, संध्या गुप्ता, रश्मि मिश्रा, लक्ष्मी कुमारी, निर्मला जौहरी, अंजलि, कोकिला राय, मधु सेन, मधु मित्रा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews