मेरे मन के गीत
अरुण दिव्यांशजिसको लिया है जीत ,
वही मेरे मन का प्रीत ,
वही तो मेरे मन में बसा ,
वही मेरे मन के गीत ।
जिसने मन वृक्ष लगाया ,
जिसने जड़ जल पटाया ,
जिसने मन बहलाने को ,
सुंदर मनबाग सजाया ।
देता मेरे मन को है शीत ,
जिसमें हमदोनों के हित ,
जिसने है दिल मिलाया ,
वही मेरे मन के गीत ।
किसी में सुंदर पुष्प खिले ,
किसे में मधुर फल लगे हैं ,
तितली उड़ती भॅंवरे गुॅंजे ,
सुंदर बगीचे सुगंध भरे हैं ।
जैसे बल देने वाला है घृत ,
जो बस चुका मेरे है चित्त ,
वही बना मेरे मन के मीत ,
वही मेरे मन के गीत ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews