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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर पं. हृदय नारायण झा ने रचा कीर्तिमान, एक सप्ताह में अनेक मंचों से दिया योग का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर पं. हृदय नारायण झा ने रचा कीर्तिमान, एक सप्ताह में अनेक मंचों से दिया योग का संदेश

डॉ. राकेश दत्त मिश्र
पटना, बिहार। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग (Yoga for Healthy Ageing)" को जन-जन तक पहुंचाने में पटना के वरिष्ठ योग विशेषज्ञ एवं पत्रकार पंडित हृदय नारायण झा ने अभूतपूर्व योगदान देकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। योग दिवस के अवसर पर उन्होंने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक मंचों पर योग की उपयोगिता, प्रासंगिकता और स्वस्थ जीवन में उसकी भूमिका पर व्यापक मार्गदर्शन दिया।

विडंबना यह रही कि राजधानी के मुख्यधारा मीडिया की दृष्टि इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर नहीं पड़ी, जबकि योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के इस समर्पित संवाहक के कार्य को सार्वजनिक पहचान मिलनी चाहिए थी। इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए दिव्य रश्मि ने उनके प्रयासों को सामने लाने का निर्णय लिया।

योग दिवस सप्ताह की शुरुआत 19 जून को दूरदर्शन बिहार के लोकप्रिय कार्यक्रम गांव घर में योग विशेषज्ञ के रूप में उनकी उपस्थिति से हुई। इस दौरान उन्होंने पंचतत्व आधारित मानव शरीर, उसके स्वाभाविक गुणों तथा शरीर में संतुलन बनाए रखने के लिए योग की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रेचक और पूरक प्राणायाम का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।

20 जून की सुबह पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित होली क्रॉस इंटरनेशनल स्कूल में एसेन्स एक्टिविटीज सेंटर एवं इनरव्हील क्लब सत्या दानापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित योग सत्र में महिलाओं को बढ़ती उम्र के साथ फिटनेस बनाए रखने के उपाय बताए। उन्होंने नाड़ी शोधन, रेचक-पूरक प्राणायाम के साथ वज्रासन, शशकासन, भुजंगासन, मार्जारासन, उष्ट्रासन एवं त्रिकोणासन का अभ्यास कराया।

इसी दिन अपराह्न में मीठापुर स्थित कबीर मंदिर परिसर में आयोजित सत्संग में उन्होंने संत कबीर को सिद्ध योगी के रूप में प्रस्तुत करते हुए सहज साधना, नादयोग और सुरति-शब्द योग की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि हठयोग और आंतरिक साधना आजीवन स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के महत्वपूर्ण साधन हैं।

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम Indian Oil Corporation Limited के बिहार स्टेट ऑफिस में आयोजित हुआ। यहां पं. झा ने आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित सामान्य योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कराते हुए वैदिक प्रार्थना "संगच्छध्वं संवदध्वं" का अर्थ और कॉर्पोरेट जीवन में उसकी प्रासंगिकता समझाई। उन्होंने कहा कि संगठन में विचारों, व्यवहार और कार्यशैली की एकरूपता से सामूहिक क्षमता का विकास होता है। इसके बाद उन्होंने स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग, प्राणायाम, कुंभक तथा आत्मध्यान का अभ्यास कराया।

योग दिवस के अवसर पर मैथिली की प्रतिष्ठित संस्था चेतना समिति में पहली बार योग दिवस का आयोजन किया गया। यहां उन्होंने महर्षि याज्ञवल्क्य की योग परंपरा का उल्लेख करते हुए मिथिला की समृद्ध योग विरासत पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता बताई। उन्होंने पारंपरिक मिथिला योग पद्धति के अंतर्गत आसन, प्राणायाम, मुद्रा एवं बंध का अभ्यास कराया।

अपराह्न में राजापुर स्थित श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर परमहंस पीठ सत्संग धाम में आयोजित विशेष योग सत्र में बच्चों को योग संस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर पं. झा ने पद्मासन, तुलासन, आकर्ण धनुरासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन और हस्तपादासन जैसे आसनों का प्रशिक्षण देकर बच्चों को स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन के लिए प्रेरित किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि योग दिवस के अवसर पर इतने विविध मंचों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित कर एक ही योगाचार्य द्वारा इतने व्यापक स्तर पर जनजागरण का उदाहरण अत्यंत दुर्लभ है। पिछले 12 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजनों में किसी एक योग विशेषज्ञ द्वारा इतने अधिक कार्यक्रमों में सहभागिता का उदाहरण विरले ही देखने को मिला है।

योग और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए पं. हृदय नारायण झा द्वारा किया गया यह कार्य न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यह भी प्रश्न उठता है कि जो कार्य सरकारी संस्थानों और सांस्कृतिक विभागों को व्यापक स्तर पर करना चाहिए था, उसे एक व्यक्ति ने अपने समर्पण और संकल्प के बल पर सफलतापूर्वक कर दिखाया। पं. हृदय नारायण झा का यह योगदान निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की एक प्रेरक उपलब्धि के रूप में याद किया जाएगा।


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