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थोड़ा सा कुँवारा हूँ

थोड़ा सा कुँवारा हूँ

 अरविन्द अकेला

मैं हूँ थोड़ा शादीशुदा
थोड़ा सा कुँवारा हूँ
पत्नी से प्रताड़ित मैं
बन गया बेचारा हूँ।
थोड़ा सा कुँवारा...l


बात-बात पर लड़ती है वो
बात-बात पर झगड़ती है
बोलते रहती मुझको पागल
कहती मैं आवारा हूँ।
थोड़ा सा कुँवारा...l


चल रही मेरी उम्र पचपन का
दिल हैं मेरा बचपन का
देखता हूँ जब किसी असहाय को
देता उसे सहारा हूँ।
थोड़ा सा कुँवारा...l


आज भी धड़कता दिल है मेरा
जीवनसंगिनी पर मैं मरता हूँ
वही तो है मेरी चाँदनी
मैं उसका चाँद,तारा हूँ।
थोड़ा सा कुँवारा...l


गज़ब का हैं ये मेरा दिल
कर देता जीना मुश्किल
देखता हूँ किसी हसीना को
उसपर आहें भरता हूँb।
थोड़ा सा कुँवारा...l
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 अरविन्द अकेला, पूर्वी रामकृष्ण नगर,पटना-27
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