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मत कहो तुम बुढ़ा मुझे

मत कहो तुम बुढ़ा मुझे

अरविन्द अकेला
मत कहो तुम बुढ़ा मुझे
अभी तो मैं जवान हूँ
जीत सकता हूँ कुश्ती तुमसे
जवानी की पहचान हूँ।
मत कहो तुम बुढ़ा...l


माना मेरी उम्र ढल रही
पचपन की मेरी उम्र चल रही
चल रहा हूँ जीवन पथ पर
कर रहा कल्याण हूँ।
मत कहो तुम बुढ़ा...l


मेरी भी भुजाएं फड़कती हैं
मेरी भी भौंहे तनती हैं
दुश्मन देख डरता मुझसे
मैं भी देश की शान हूँ।
मत कहो तुम बुढ़ा...l


मुझमें भी जोश,जुनून है
उबलता हुआ खून है
नहीं करता गद्दारी देश से
मैं देश का स्वाभिमान हूँ।
मत कहो बुढ़ा हमें...l


मुझपर भी लोग मरते हैं
सजते और संवरते हैं
मिलते हैं जब राहों में
करता उनका सम्मान हूँ।
मत कहो तुम बुढ़ा...l
-------00------ अरविन्द अकेला,पूर्वी रामकृष्ण नगर,पटना-27
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