फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान
कुमार महेंद्रसंघर्षों की धूप हो, उपेक्षाओं की आँधी हो,
अरमान अधूरे हों, फिर भी जीवन का सबसे सुंदर साहस यही है —
“फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान”
हर परिस्थिति में आशा, धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखने का एक छोटा सा प्रयास।
आप सभी का स्नेह एवं आशीर्वाद सदैव अपेक्षित। 🙏
— कुमार महेंद्र
कंटक-पथ, संघर्ष अथाह,
विपरीत समय की तीव्र गति।
हर पग तिरस्कारों की धूल,
दिग्भ्रमित मानव की मति।
दूर-दूर तक श्रव्य नहीं,
आशा का कोई मधुर गान।
फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान।।
जीवन-पथ पर साथ न दे,
जब कोई सच्चा मीत।
स्वार्थ-वायु में विलुप्त हुए,
नेह-स्नेह के सारे गीत।
सदाचार की राहों में भी,
मिलते हों केवल अपमान।
फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान।।
जब संकट-मेघों का घेरा,
छा जाए चारों ओर।
क्रोध, घृणा, वैमनस्य जलें,
नैराश्य भरे हर भोर।
घोर तपस्या के पश्चात् भी,
पूरे न हों यदि अरमान।
फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान।।
जब सत्य स्वयं विवश दिखे,
और धर्म लगे हैरान।
नैतिकता की पुण्य धरा पर,
घटती जाए मानव-शान।
भौतिकता की चकाचौंध में,
खो जाए गुण की पहचान।
फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान।।
जब श्रम का मूल्य न मिल पाए,
और टूटने लगे विश्वास।
अपने ही जब पीड़ा दें,
सूना लगे जग का प्रकाश।
तब भी मन के दीप जलाकर,
रखना आशा का सम्मान।
फिर भी चेहरे पर हो मुस्कान।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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